दिल्ली से हस्मत अली साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से दहेज प्रथा पर अपने विचार व्यक्त कर रही है। वे बताती हैं कि बेटी पैदा होते ही माता -पिता को दहेज की चिंता हो जाती है ।देश में दहेज़ प्रथा धीरे धीरे बढ़ते ही चला जा रहा है। इस आधुनिक युग में भी दहेज़ प्रथा एक अभिशाप के रूप में फ़ैल चूका है
