धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड अंतर्गत रेगुनि पंचायत से मनोहर महतो जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि समय पर पैक्स द्वारा किसानों को धान के बीज उपलब्ध नहीं कराई जाती है। खेतों में बीज डालने का समय आ गया है , लेकिन कही भी खेतो में धान लगाने के लिए बीज उपलब्ध नहीं है।ऐसे में अगर किसानो को बीज नहीं मिलेगा तो, किसान खेती कैसे कर पायेंगे यह एक विचारणीय प्रश्न है ? आज बीज उपलब्ध न हो पाने के कारण किसान भटक रहे हैं ।गौरतलब है कि किसान खेती पर ही निर्भर होते हैं, और यही वजह है कि किसान दुकानों से महँगी दामों में बीज खरीदकर खेतों में लगाने को बेबश हैं। वे कहते हैं कि पैक्स में धान तो उपलब्ध रहता है लेकिन बुआई-जुताई का समय खत्म हो जाने के बाद ।
जिला बोकारो पेटरवार से सुषमा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं कि वर्तमान समय में किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या। एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है । यदि इसी तरह से किसानों की ऐसी स्थिति बनी रही, तो किसान कभी भी खेती नहीं करेंगे और भारत की स्थिति दयनीय हो जाएगी। फलस्वरूप जनता को दाने-दाने के लिए तरसना पड़ेगा।ऐसी स्थति में सरकार द्वारा किसानों पर विशेष ध्यान दे कर उन्हें प्रोत्साहित करने की जरुरत है। साथ ही ऋण माफ़ी कर किसानो को अधिक से अधिक लाभ मुहैया कराने की आवश्यकता है ताकि किसान खेती करने के लिए उत्साहित हो।यदि सरकार किसानों की वस्तु-स्थति को देखते हुए इस मामले को गंभीरता पूर्वक लेगी तो किसानों का ऋण बिलकुल माफ़ हो सकता है।किसानों का जीवन केवल कृषि पर ही निर्भर होता है। ऐसे में कभी-कभी किसानों को फसल उपज करने में कई तरह की परेशानी जैसे-सुखाड़,समय पर बारिस न होना आदि से भी खेती करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही सरकार द्वारा बीज मुहैया नहीं कराई जाने पर किसान समय पर फसल उपज नहीं कर पाते हैं। और यदि सरकार समय पर खाद्य,बीज मुहैया कराती भी हैं तो बिचौलियों द्वारा किसानो तक नहीं पहुंचाया जाता है। वहीं ग्राम पंचायत में कृषि सम्बंधित बनाई गई योजना के तहत भी किसानों को किसी भी तरह का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में कई बार किसान आंदोलन करने पर मजबूर हो जाते हैं।
पूर्वी सिंघभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत हाथीबिंदा पंचायत से चक्रधर भगत जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि किसान हमारे अन्नदाता होते हैं । इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा कई योजनाएं किसानों के हित में चलाई जा रही हैं, लेकिन उन योजनाओ का लाभ किसानो को नहीं मिल पा रही है। और सरकार का इस ओर किसी भी प्रकार का कोई ध्यान भी नहीं है।किसानो को सरकारी योजनाओ का लाभ नहीं मिल पाता इसका मुख्य वजह हैं कृषि योजनाओं में बिचौलियों का हावी होना।इतना ही नहीं किसानो के लिए कृषि विभाग द्वारा संचालित किसी भी तरह की योजनाओं की जानकारी किसानों को नहीं होती है।वर्तमान समय में यह भी देखा जाता है कि आज कल के किसान कृषि कार्य से उभ कर दुसरो के दुकान में काम करना ज़्यादा पसंद करते हैं।इसका मुख्य कारण है किसानो को खेती करने से दिन-प्रतिदिन नुक्सान का सामना करना पड़ता है।एक बात और गौर करने वाली यह है कि वर्तमान में वही व्यक्ति किसान की गिनती में आते हैं जिनका खुद का जमीन होता है परन्तु ऐसा नहीं होता है।चूँकि वे लोग भी कृषि कार्य करते हैं जिनके पास खुद का जमीन नहीं होता है।कई किसान ऐसे हैं जो दूसरों के जमीन में भी फसल उपजाते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वे कृषि कार्य से जुड़े सभी लोगों को किसान की सूचि में शामिल करें एवं किसानो के वर्तमान स्थिति पर ध्यान दे। साथ ही इस दिशा में सरकार को जमीनी स्तर पर काम करने की जरुरत है।
जिला मुरैना मध्यप्रदेश से कालीचरण जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि सरकार किसानों की मदद करनी चाहिए क्यूंकि जिन किसानो को सहयोग की जरुरत है उन किसानों को सरकार द्वारा मदद नहीं मिल पाती है जो जिन्हे सहयोग की जरुरत नहीं उन्हें सरकार सेवा प्रदान करती है। सभी किसान कर्ज नहीं लेना चाहते है लेकिन जो लेना चाहते है उन्हें भी कर्ज नहीं दिया जाता है। कई किसान खेती करने के उद्देश्य से लोन लेकर गाड़ी-मोटरसाइकिल खरीदते है। इस तरह के किसानो पर जाँच होनी चाहिए। लोन देने से पहले कागज-पत्र की शुद्धि लेनी चाहिए कि ये व्यक्ति इस कर्ज के काबिल है या नहीं। सरकार ऐसे लोगो को कर्ज दे जिसे वास्तव में पैसो की जरुरत हो। जो अमीर व्यक्ति है उन्हें खेती करने के लिए कर्ज नहीं देना चाहिए। इस व्यवस्था से अमीर वाले अमीर होते जा रहे है और गरीब व्यक्ति और भी गरीब होते जा रहे है।
हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड से राजेश्वर महतो जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि समर्थन मूल्य ना मिलने के कारण राज्य के किसान कर्ज में डूब गए हैं, और यहां के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।झारखण्ड सरकार किसानों के लिए कई लाभप्रद एवं सशक्त योजनाएं चल रही है, जिससे किसान लाभावांवित भी हो रहे है।उन्होंने बताया कि किसान खेती करने के लिए बैंक से के.सी.सी एवं एफ़.सी.सी सस्ते ब्याज पर कर्ज लेते है, लेकिन गौर करने वाली बात हैं कि कई किसान जो ऋण कृषि कार्य के लिए लेते हैं, उसे खेती कार्य में न लगाकर घर बनाने, गाड़ी-मोटर खरीदने एवं अन्य वस्तुएं खरीदने में उपयोग करते हैं।और बिडंबना यह है कि बाद में वही किसान ,सरकार से कर्ज माफ़ करने के लिए गुहार लगाते हैं । वे कहते हैं कि कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो ऋण लेकर खेती करते हैं, लेकिन बाढ़,सूखा या किसी कारणवश उनका फसल नष्ट हो जाता है। किसानो को खाद्य, बीज, डीजल, कृषि यन्त्र आदि में सब्सिडी तो मिलता है लेकिन वो भी नाम मात्र का । अत: उनका कहना है कि इसके लिए सरकार को समर्थन मूल्य निर्धारित करना चाहिए। साथ ही सरकार को इस बात का उच्च स्तरीय जाँच करने की जरुरत है कि कर्ज लेने वाला किसान वास्तव में ऋण के पैसे से फसल लगा रहा है या नहीं। और फिर सरकार को उन्हीं किसानों का ऋण माफ़ करना चाहिए ,जो ऋण लेकर फसल लगाते है
वर्तमान समय में भारत में कृषि पर छाया संकट निरंतर गहराता जा रहा है।खराब मौसम की मार के कारण खेती , किसानो के लिए मुसीबत का कारण बन जाती है।किसानो द्वारा फसलों की ज्यादा पैदावार करने के बावजूद, उसके लिए पर्याप्त भण्डारण क्षमता का ना होना भी एक बड़ी समस्या है।प्रति वर्ष देश के कई राज्यों के किसानो द्वारा सरकार से करोड़ो रुपये की सहायता की गुहार कृषि लोन की माफ़ी के रूप में लगाई जाती है।आपके अनुसार क्या कृषि लोन को माफ़ कर किसानों की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है ?आपके अनुसार राज्य के किसानों को फसलो की उपज को बेचने में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है ?सरकार द्वारा पैक्स के माध्यम से फसलों की खरीद से क्या वाकई में किसानो का भला हुआ है ? खेती में बढ़ती लागत को लेकर क्या सरकार किसानो की फसलो का उचित समर्थन मूल्य दे पा रही है ? किसानों के लिए जिला,ग्राम या पंचायत स्तर पर कृषि से सम्बंधित जितनी भी योजनाए बनायीं गयी है क्या वह कितनी कारगर साबित हो रही ?
