जमशेदपुर से धरनी जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि जमशेदपुर प्रखण्ड के दलदली पंचायत के अंतर्गत पिछले आठ दिनों से बारिश नहीं हुई है। जिसके कारण लोगो में अफरा-तफरी मची हुई है। दिन में काफी गर्मी रहती है और लू भी चलती है और लोग इस धुप में घूम रहे है,इससे लोगो को लू भी लग सकती है। इनका सभी से कहना है कि इस गर्मी के मौसम में धुप में न घूमे।
जमशेदपुर जिले से धरनी गोराई जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि पंचायती राज होने के बावजूद भी गांव में विकास का काम नहीं हुआ है। सरकार ने कहा है कि पंचायती राज होने पर गाँवो को काफी विकसित किया जा सकता है, लेकिन ये सब नहीं हो रहा है। धरनी जी कहना है कि पंचायत के सभी अधिकारी सिर्फ अपना देख रहे है विकास के नाम पर ना शौचालय,ना पक्की सड़क, ना अच्छी बिजली व्यवस्था और ना ही स्वच्छ पानी लोगो को मिल पा रही है। गांव पूरी तरह पिछड़ा हुआ है इसमें किसी भी तरह का विकास नहीं हो रहा है।
जमशेदपुर जिले से धरनी गोराई जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि गांव में ज्यादातर लोग किसान एवं श्रमिक होते है। इनके पास अधिक मात्रा में पालतू पशु पाये जाते है जिसके मल को डालने के लिए एक बड़े से गड्ढे का स्तेमाल किया जाता है, जब बारिश के मौसम में ये गड्ढा पूरी तरह भर जाता है तब इस जल-जमाव के कारण मलेरिया मच्छर पनपते है और लोगो को अपनी चपेट में ले लेते है जिससे लोगो को मलेरिया हो जाता है। उनका कहना है कि ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए कि इस गड्ढे को भरा जा सके या इसके निपटारन के लिए कोई तकनीक अपनायी जा सके। सरकार द्वारा दवा का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है जिसके कारण लगो को मच्छर से जूझना पड़ रहा है। इसलिए सरकार या प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए जिससे लोग मलेरिया जैसी मच्छरों से बच सके।
पूर्वी सिंहभूम, जिला जमशेदपुर, पंचायत दलदली के गांव हरमाडीह से धरणी जी मोबाईल वाणी के माध्यम से कहते है कि इनके गांव में पिछले एक साल में एक ही बार ग्रामसभा का आयोजन हुआ है। राज्य में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बावजूद भी इनके पंचायत में कोई विकास नहीं हो रहा है ।वे बताते है कि हरमाडीह गाँव में मात्र एक ही शौचालय है इससे पता चलता है की विकास किस गति से हो रही है। अब ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस गांव का विकास किस गति से हो रहा है।
पूर्वी सिंघभूम से धरनी ने मोबाइल वाणी के माधयम से जानकारी दी कि पहाड़ के जंगलो में पके फल उपलब्ध हैं ,जिनका सेवन किया जा रहा है। ये फल मीठे और छोटे -छोटे हैं तथा खाने में स्वादिष्ट हैं। जंगलो में लोग जा कर इन फलो को सूचि के साथ खा रहे हैं
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धरनी जी जमशेदपुर से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि गर्मी के मौसम में खट्टे मीठे फलों का मज़ा लेना चाहिए। गर्मी के मौसम में ग्रामीण छेत्रों में सारे खट्टे मीठे फल मिलते है जैसे -पियाल ,बेल ,आम , जामुन ,कटहल आदि। इन फलों का सेवन करने के नाम से ही मुँह में पानी आ जाता है
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