यक्ष्मा मरीजों को चिह्नित करने में इस डिजिटल सुविधा से मिलेगा लाभ : सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि आवाज के सैंपल लेने के लिए जिला के सभी प्रखण्डों में काम करने वाले सभी एसटीएस, एसटीएलएस,एलटी सहित अन्य लोगों की ऑनलाइन ज़ूम मीटिंग के जरिये विगत 24 जनवरी को ट्रेनिंग कराई गई है। यदि यह टेक्नोलॉजी सफल होती है तो टीबी की पहचान और इलाज काफी आसान हो जाएगा। इसके साथ ही समय की भी काफी बचत होगी ,जिससे टीबी मरीजों को बहुत फायदा मिलेगा।