*ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी की पुण्यतिथि पर कवि-सम्मेलन* दुनिया की हर चीज पिता बदौलत, पिता से ही हम पाते हैं दौलत। पिता बिन आंखों में आंसू, पिता है तो हम होते धांसू। उपर्युक्त रचना बी.पी.मोदी फाउंडेशन के बैनर तले ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी की दसवीं पुण्यतिथि पर आयोजित कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए जनकवि विजय बर्तनिया ने प्रस्तुत किया। वहीं संचालक महासचिव आशुकवि सुबोध छवि ने आजकल की मानसिकता पर सवाल खड़े करते हुए कहा "गजब की मानसिकता है जो बिल्कुल साफ दिखता है, समझता है बड़ा खुद को कहां इंसाफ दिखता है"। दो नंबर गुमटी स्थित ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी के आवास पर आयोजित इस कवि-सम्मेलन में अपनी रचना का पाठ करते हुए उनके पुत्र संजय केशरी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा "अब कौन करके नेकी दरिया में डालता है, हर शख्स आस्तीन में एक सांप पालता है; आजकल तो भला का जमाना ही नहीं रहा, जिसका गला दबाओ वो आंखें निकालता है"। इस अवसर पर बी.पी. मोदी फाउंडेशन के अध्यक्ष नरेश कुमार गुप्ता ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्व. मोदी का जीवन सार था "मुसीबत में जो देता है उसी को दान कहते हैं, पराये दुख को जो समझे उसे इंसान कहते हैं"। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए समाजसेवी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि आज जबकि दान और मदद एक दिखावा मात्र रह गया है तो ऐसी विषम परिस्थिति में स्व. मोदी के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है। इस अवसर पर केशव केशरी, सखिचन्द यादव, अजय प्रसाद सिंह, आजाद शर्मा, चन्दन गुप्ता, अरुण केशरी, युवराज सिंह, राजेश शर्मा आदि उपस्थित थे।