बच्चे मोबाइल पर ही फुटबॉल खेल कर अपने आप को तंदुरुस्त समझते हैं -सीनियर खिलाड़ियों की पूछ अब खत्म हो गई है -क्रिकेट के बढ़ते क्रेज के कारण फुटबॉल का क्रेज समाप्त मुंगेर: कभी फुटबॉल मुंगेर की शान हुआ करते थे, लेकिन आज मैदान वीरान लग रहा है। यह बातें खेल प्रेमी महमूद आलम ने राष्ट्रीय खेल दिवस हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद सिंह के जन्म दिवस 29 अगस्त के पूर्व कही। उन्होंने कहा कि आज उसका कोई नाम लेने वाला नहीं है। खेल के प्रति घटती रुचि बताते हैं अब बच्चों को मैदानी खेल के बदले मोबाइल गेम खेलने में समय बिताते देखा जा सकता है। आज के बच्चे मोबाइल पर ही फुटबॉल खेल कर अपने आप को तंदुरुस्त समझते हैं । जबकि मैदानी परिश्रम से शरीर मजबूत होता है । अब युवाओं में अनुशासन की कमी आ गई है। सीनियर खिलाड़ियों की पूछ अब खत्म हो गई है, इसके अलावा क्रिकेट के बढ़ते क्रेज के कारण फुटबॉल का क्रेज समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई है। जिसके कारण यह खेल समाप्त हो चुका है। आज कोई फुटबॉल का नाम लेने वाला नहीं है।