ओबीसी के लिए 7 अगस्त स्वर्णिम दिन, आज ही 1990 में 27% आरक्षणमिला आज का दिन ओबीसी के लिए स्वर्णिम दिन माना जाता है क्योंकि आज के ही दिन यानी 7 अगस्त 1990 को उस समय के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने ओबीसी के लिए 27% आरक्षण लागू किया था इस पुनीत कार्य के लिए जिला राजद मुंगेर के उपाध्यक्ष राज्य परिषद सदस्य प्रोफेसर विनय कुमार सुमन अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मोहम्मद साहब मलिक अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष श्रीनिवास सिंह दलित प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष श्री अशोक रजक जिला छात्र राजद के पूर्व अध्यक्ष श्री विजय कुमार गुप्ता पंचायती राज्य प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष विजय कुमार यादव उपाध्यक्ष संजय कुमार संजू राजद सदर प्रखंड के अध्यक्ष श्रीमती निशा भारती प्रिय राजद नेता अशोक चौधरी ने इस अवसर पर संयुक्त बयान जारी कर पूर्व प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह एवं ओबीसी के लिए संघर्ष करने वाले त्रिमूर्ति सर्व श्री लालू प्रसाद मुलायम सिंह यादव एवं शरद यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जिनके प्रयास से ओबीसी को 27% आरक्षण मिला साथ ही हम याद करते हैं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर को जिन्होंने ओबीसी के हक के लिए आजीवन संघर्ष किया साथ ही नेताओं ने कहा कि आज समय की मांग है की आबादी के आधार पर ओबीसी एवं दलित को आरक्षण में स्थान दिया जाए साथ ही निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था की जाए क्योंकि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर बड़े ही चालाकी से सरकारी संस्थाओं का निजी करण कर ओबीसी के लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित कर रहा है अतः जिला राजद यह मांग करती है कि सरकारी संस्थाओं के धोती निजी संस्थानों में भी ओबीसी के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाए साथ ही जितने भी धार्मिक एवं गैर धार्मिक ट्रस्ट हैं उसमें वह भी सीएम दलित के लिए आरक्षण सुनिश्चित की जाए राम जन्म भूमि के लिए ओबीसी हम दलित के युवकों ने सड़कों पर संघर्ष किया पर नवगठित राम जन्मभूमि न्यास बोर्ड में एक भी पिछड़ा एवं दलित को सदस्य नहीं बनाया गया नया पालिका में भी एक वर्ग का वर्चस्व है दलित एवं पिछड़ा वर्ग को एक साजिश के तहत उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है और अब तो बड़ी ही चालाकी से मोदी सरकार ओबीसी को 27% पर ही सीमित कर दिया है पहले ओबीसी का मेधावी छात्र जो अच्छे अंक लाकर प्रतियोगी परीक्षा में सफल होते थे उसका चुनाव सामान्य वर्ग में होता था उसे अब 27 प्रतिशत के अंदर हैं सीमित कर दिया गया है अतः हम मांग करते हैं कि ओबीसी एवं दलित तथा आदिवासियों को उसकी संख्या के आधार पर सरकारी निजी तथा धार्मिक संस्थाओं में आरक्षण की सुनिश्चित व्यवस्था की जाए आना था इन वर्ग के लोग सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने के लिए बाध्य होंगे
