जमालपुर रेल नगर में पूर्व काबीना मंत्री स्वर्गीय उपेन्द्र प्रसाद वर्मा का कुनबा इस कदर उखड़ गया कि राजद के कई नेता मौजूद नहीं थे। यहां तक कि नगर अध्यक्ष मंटू यादव भी नहीं थे। इसके साथ ही वर्मा के कई पुराने साथी एवं जिला अध्यक्ष नहीं होने से राजद में अंंर्तःकलह खुलकर सामने आने लगा है। जो चुनाव के लिए काफी घाटे का सौदा होगा। मौका था राजद के पूर्व काबीना मंत्री उपेन्द्र प्रसाद वर्मा के पुत्र का जमालपुर में धमाकेदार समागम के जरिये चुनावी इंट्री का ? स्वर्गीय पूर्व मंत्री वर्मा बिहार के द्वितीय मुख्यमंत्री कहे जाते रहे हैं तथा उन्होंने अपने कार्यकाल में किसी तरह के घोटाले का आरोप नहीं लगा। जिसकी ईमानदार छवि को लेकर जगदानंद सिंह एवं लालू यादव वाकिफ है । वहींं पिता के उच्च छवि के कारण ही पुत्र जय वर्मा को तेजस्वी यादव ने क्षेत्र में घूमने को कहा लेकिन पहली ही बैठक मुरझाया होने एवं क्लेवर नहीं होने से। राजद में संवैधानिक पद पर आसीन नेताजी मौजूद नहीं थे। वही समागम के संयोजक ने कई नेताओं को नहीं पूछने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विदित हो कि प्रभाकर चौरसिया के हाथों में बैठक की मेंटेनेंस करने की प्रक्रिया दी गई थी। जिन्होंने सिर्फ बाल वर्ग को जुटा लिया था। जिसे राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। आपको बताते चलें कि यह सीट जमालपुर विधानसभा का है। जहां पर पूर्व मंत्री उपेन्द्र प्रसाद वर्मा काबीना मंत्री थे। जिसके कारण ही वर्तमान विधायक शैलेश कुमार को नीतीश कुमार ने ग्रामीण विकास मंत्री बनाया है और राजद की बैठक में प्रत्याशी का परिचय वह राजद के नगर अध्यक्ष के वार्ड में हो रही थी फिर भी नगर अध्यक्ष मंटू यादव मौजूद नहीं थे।तथा पूर्व में बहुत ही मुश्किल से अलग ध्रुव जयप्रकाश नारायण यादव एवं वर्मा जी तेजस्वी की सभा में आते। लेकिन लॉकडाउन ने कमर तोड़ी तो वर्मा की मौत के बाद राजद का एक गुट टूटा। इधर कार्यकर्ता उमस भरी गर्मी से भी काफी परेशान थे। क्योंकि समागम दौरान तीन से चार बार बिजली का आना जाना लगा रहा।
