समाज कल्याण विभाग के समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय ने आम जनता को पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है . कोई भी व्यक्ति टॉल फ्री नंबर 18001215725 पर फ़ोन कर पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा से जुड़ी जानकारियां घर बैठे प्राप्त कर सकता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
सितंबर माह को जिले में राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में आईसीडीएस विभाग के द्वारा मनाया जा रहा है। इस दौरान समाज से कुपोषण को मिटाने के लिए समुदाय स्तर पर तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ-साथ पोषण के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आम जनों को जागरूक भी किया जा रहा है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
पोषण परामर्श केंद्र पर लाभार्थियों को मिल रही है पोषण के पांच सूत्रों की जानकारी • आईसीडीएस के कार्यालय में संचालित है जिलास्तरीय परामर्श केंद्र • कॉल के माध्यम से भी दी जा रही है पोषण की जानकारी • पोषण के पांच सूत्रों से दूर होगा कुपोषण छपरा। जिले में कुपोषण को दूर करने के लिए सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया जा रहा है। आमजनों को पोषण के प्रति नजरिया व उनके रोजाना के व्यवहार में बदलाव लाने के मद्देनजर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना भी की गयी है। पोषण परामर्श केंद्र की मदद से माता- पिता को अपने शिशुओं के बेहतर पोषाहार व बच्चों में कुपोषण की स्थिति की जानकारी दी जा रही है। आईसीडीएस कार्यालय में जिलास्तरीय पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना की गयी है। जहां पर डीपीओ वंदना पांडेय, पोषण अभियान के जिला समन्वयक सिद्धार्थ सिंह, जिला परियोजना सहायक आरती कुमारी के द्वारा पोषण पर काउंसलिंग की जा रही है। आईसीडीएस के डीपीओ वंदना पांडेय ने बताया कि पोषण परामर्श केंद्र की मदद से शिशुओं, बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को आवश्यक पोषण की जानकारी प्राप्त करने में काफी सुविधा हुई है। पोषण संबंधी जानकारियां प्राप्त कर इसके इस्तेमाल से वह अपने रोजमर्रा की रसोई में पोषक तत्वों को शामिल कर सकती है। कुपोषित बच्चों के माता-पिता पोषण परामर्श केंद्र से विभिन्न प्रकार के भोजन में मौजूद पोषक तत्वों के लाभ के बारे में जानकारी हासिल कर अपने बच्चों की सेहत बनाने में उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने बताया सामुदायिक सहभागिता से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गांव के हर घर में शौचालय हो और खुले में कोई भी शौच करने के लिए नहीं जाये। अच्छे पोषण का सीधा संबंध स्वच्छता से है। घर में पकाई जाने वाली चीजों को अच्छी तरह धोया जाये। बच्चों का खाना खिलाने से पहले व शौच के बाद बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है। पोषण के पांच सूत्रों को मिल रही है जानकारी: आईसीडीएस के जिला परियोजना सहायक आरती कुमारी ने बताया पोषण माह के दौरान पोषण के पांच सूत्रों की चर्चा की जा रही है। इनमें जन्म के पहले सुनहरे 1000 दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया प्रबंधन, डायरिया प्रबंधन, स्वच्छता एवं साफ-सफाई जैसे विषय शामिल है। पहले 1000 दिन के तहत बच्चों के जन्म से लेकर दो साल तक की उम्र तक उनके शारीरिक व मानसिक विकास पर चर्चा की जा रही है। इसके बाद पौष्टिक आहार के अंतर्गत शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने संबंधी बातों की जानकारी दी जा रही है। स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। एनीमिया प्रबंधन के तहत आयरन संबंधी दवाओं की जानकारी दी जा रही है। डायरिया प्रबंधन के अंतर्गत शिशुओं के डायरिया से बचाव की जानकारी दी जा रही है। फोन कॉल के माध्यम से दी जा रही है जानकारी: पोषण अभियान के जिला समन्वयक सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि पोषण परामर्श केंद्र पर तो जानकारी दी ही जा रही है। इसके अलावा फोन कॉल के माध्यम से भी लोगों को पोषण की जानकारी दी जा रही है। पोषण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह पहल शुरू की गयी है, ताकि अधिक से अधिक लोग पोषण के प्रति जागरूक हो सके। पोषण पर अधिक जानकारी लिए 9631010032 पर कॉल कर जानकारी ले सकते हैं। अब तक 100 अधिक लाभार्थियों को मिली जानकारी: पोषण माह के तहत संचालित जिलास्तरीय पोषण परामर्श केंद्र पर काफी संख्या में लोग जानकारी लेने के लिए पहुंच रहें है। यहां पर अभी तक 100 से अधिक लाभर्थियों को पोषण के प्रति जागरूक किया गया है। पोषण के पांच सूत्रों को विस्तार से जानकारी दी गयी है। इसके साथ हीं पोषण अभियान को जनआंदोलन में बदलने के लिए सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। परामर्श केंद्र पर दी जा रही है ये जानाकरी: • जन्म के छह माह तक सिर्फ माँ का दूध पिलायें • छह माह के बाद बच्चों को स्तनपान के साथ पूरक आहार दें • गर्भवती होने पर आंगनबाड़ी केंद्र पर रजिस्टेशन करायें • बच्चों को खाना खिलाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें • गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का सेवन करें • गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली जरूरी लेनी चाहिए
सराज्य जिले में 19 से 29 सितंबर तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा और राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यकर्म चलेगा। इस मौके पर होने वाले की दर में कमी लाने के लिए साधन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा की शुरुआत की गई है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
आयुष्मान भारत के तहत 2 लाख से अधिक मरीजो का इलाज किया जा चुका है और लगभग 25 लाख परिवारों को गोल्डन कार्ड निर्गत किया जा चुका है | विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
आयुष्मान भारत योजना के तहत बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित नवीन योजना हेल्प बेनिफिट पैकेज 2.0 स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार से लागू कर दिया गया। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
न्यूज परसा:(सारण) प्रखण्ड कार्यालय के सभागार में बाल विकास परियोजना के तहत पोषण परामर्श केंद्र खोला गया । पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। श्रोताओ 9211791369 पर मिस कॉल कर जिले का हर छोटी बड़ी खबर सुने और 3 का बटन दबा कर अपनी समस्या या प्रतिक्रिया भी रिकार्ड करे। यदि आप स्मार्टफोन उपयोगकर्ता है! तो मोबाईल वाणी एप्प् प्ले स्टोर से डाउनलोड कर जिले से संबंधित हर छोटी बड़ी खबर को एप्प् पर सुने और लाल वाली माइक बटन दबा कर अपनी समस्या या प्रतिक्रिया भी रिकार्ड करे ।
राष्ट्रीय पोषण माह में समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ने कुपोषण को मात देने के लिए बड़ी पहल की है। कुपोषण के खिलाफ एक बड़ी मुहिम चलाने के लिए वेबिनार के माध्यम से बड़ी रणनीति बनाई जा रही है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बच्चे के जन्म के छह माह के बाद स्तनपान के साथ-साथ पूरक आहार भी जरूरी , स्तनपान से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का होगा विकास । विस्तृत जानकारी के लिए सुने निःशुल्क नंम्बर 09211791369 पर मिस्डकॉल देकर।
कुपोषित बच्चों की पहचान और रेफरल एवं प्रबंधन की होगी सुविधा ,जन्म के 1 घंटे के अंदर स्तनपान किया जाए सुनिश्चित छपरा: वर्ष 2022 तक देश में कुपोषण की दर में सुधार लाने के लिए सरकार कृत संकल्पित है। इसी क्रम में सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। पिछले वर्ष की तरह 1 से 30 सितंबर तक पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। पोषण माह के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के द्वारा भी कई गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र लिखकर सभी जिला पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है। साथ ही पोषण माह के अंतर्गत आयोजित किए जाने वाले गतिविधियों का कैलेंडर जारी किया गया है। • वीएचएसएनडी पत्र में बताया गया है अतिगंभीर कुपोषित बच्चों में सामान्य बच्चों की तुलना में 9 से 11 गुना मृत्यु का खतरा अधिक होता है तथा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की लगभग 45% मृत्यु में अति गंभीर कुपोषण एक अंतर्निहित कारक होता है। इसलिए पोषण माह 2020 के अंतर्गत सभी अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान रेफरल एवं प्रबंधन का लक्ष्य रखा गया है। समुदाय स्तर पर आशा द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से समन्वय स्थापित कर लंबाई ऊंचाई के अनुसार 3SD से कम वजन वाले बच्चों की लाइनलिस्टिंग तैयार कर आरोग्य दिवस पर एएनएम से जांच करवाना, स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। आशा द्वारा बीमार, सुस्त दिखाई देने वाले दुबलेपन, स्तनपान व भूख में कमी एवं दोनों पैरों से सूजन वाले बच्चों की लाइन लिस्ट तैयार कर आरोग्य दिवस पर उनकी जांच सुनिश्चित की जाएगी. उक्त बच्चो में सांस का तेज चलना, छाती का धंसना, फरका आना एवं लगातार उल्टी दस्त होना इत्यादि लक्षण पाए जाने पर आशा द्वारा उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुर्नवास केंद्र पर रेफर किया जाएगा। अतिकुपोषित बच्चे जिन्हें चिकित्सकीय जटिलता नहीं है एवं मध्यम गंभीर कुपोषित बच्चे की माताओं को एएनएम एमसीपी कार्ड में पोषण संबंधित दिए गए परामर्श देंगी। इन बच्चों के माता-पिता अभिभावक को नियमित आईएफए, अनुपूरक, छमाही विटामिन-ए सिरप एवं एल्बेंडाजोल टेबलेट के बारे में परामर्श दिया जाएगा। स्वास्थ्य संस्थानों के ओपीडी आईपीडी अथवा टीकाकरण के लिए आए 0 से 5 वर्ष तक के दिखाई देने वाले दुबलेपन आशा/आंगनबाड़ी एवं द्वारा रेफर किए गए कुपोषित बच्चों की लंबाई /ऊंचाई के अनुपात में वजन का आकलन सुनिश्चित किया जाएगा । डब्ल्यूएचओ के संदर्भ सारणी (एमसीपी कार्ड ग्रोथ चार्ट) के अनुसार 3SD से कम वजन वाले बच्चों में खतरे के लक्षण जैसे ( चमकी आना, दोनों पैरों में सूजन, सांस तेज चलना, छाती का धसना, लगातार उल्टी दस्त होना, तेज बुखार या शरीर का ठंडा पड़ना, भूख में कमी, खून की कमी होना, त्वचा पर घाव एवं विटामिन ए की कमी से आंख में होने वाली बीमारी को पोषण पुनर्वास केंद्र के लिए रेफर करना सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले अभिभावकों को पोषण संबंधित परामर्श दिया जाएगा पोषण स्तर के आकलन के लिए स्वास्थ्य संस्थानों पर डिजिटल वेट मशीन, इन्फेंटोमीटर, स्टेडियोमीटर, एमयूएसी टेप, एमसीपी कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। पोषण माह के दौरान सभी पोषण पुर्नवास केंद्र क्रियाशील रहेंगे तथा कोविड-19 प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल अपनाते हुए चिकित्सकीय जटिलता युक्त अति गंभीर कुपोषित बच्चों का गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित की जाएगी. उपचार के उपरांत डिस्चार्ज हुए बच्चों का दूरभाष के माध्यम से फॉलोअप कार्य नवनियुक्त सीबीसीई से करवाना सुनिश्चित किया जाएगा एवं डिस्चार्ज हुए बच्चों की सूचना संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सीडीपीओ आशा फैसिलिटेटर एवं आशा को उपलब्ध कराया जाएगा। संस्थागत एवं घर पर जन्म लेने वाले सभी नवजातो को जन्म के 1 घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराना सुनिश्चित किया जाएगा। संस्थान में स्वास्थ्य कर्मी तथा समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य कर्मी आशा इस कार्य को सुनिश्चित करेंगे.स्वास्थ्य संस्थानों में एएनसी टीकाकरण के दौरान आने वाली गर्भवती एवं धात्री माताओं को गर्भावस्था के अनुसार तथा बच्चों के उम्र के अनुसार स्तनपान एवं पोषण संबंधित परामर्श दिया जाएगा। समुदाय स्तर पर आशा मां कार्यक्रम के अंतर्गत 3 माह से ऊपर के गर्भवती एवं धात्री माताओं को गृह भ्रमण के दौरान जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराना, 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराना, 6 माह पूर्ण होने पर पूरक आहार शुरू करने के साथ स्तनपान को कम से कम 2 वर्ष तक जारी रखने एवं इनके लाभ के बारे में चर्चा करेंगी। कोविड-19 को देखते हुए बैठक के स्थान पर लाभार्थी से चर्चा करेंगे.पोषण माह के दौरान आशा द्वारा होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर कार्यक्रम के अंतर्गत अपने संबंधित क्षेत्र में शत-प्रतिशत नवजात के घर पर भ्रमण कर शिशु एवं माता के जांच तथा पोषण संबंधित सलाह देंगी। आयरन फोलिक एसिड गोली: 6 से 59 माह तथा 5 से 10 वर्ष के बच्चों किशोर किशोरियों तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के रोकथाम के लिए आईएफ़ए सिरप, आईएफए गुलाबी गोली, आईएफ़ए की नीली गोली एवं आईएफ़ए लाल गोली की उपलब्धता लाभार्थियों तक सुनिश्चित की जाएगी। नियमित टीकाकरण के साथ आशा आंगनबाड़ी, सेविका, एएनएम, स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल एवं पंचायती राज के प्रतिनिधि कुपोषण एनीमिया स्वच्छता आदि विषय पर चर्चा करेंगे। ऐसे सत्रों की फोटो खींचकर पोषण अभियान की डैशबोर्ड पर अपलोड करना होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक आरोग्य दिवस पर स्वास्थ्य पोषण विकास एवं स्वच्छता से संबंधित सेवाएं एवं जानकारियां वंचित तथा उपेक्षित वर्ग के लोगों को अवश्य दी जा रही हो एवं ऐसे प्रयासों की फोटो भी प्रतिवेदित की जाएगी।
