पादहस्तासन से रीढ़ लचीली होने के साथ साथ सुदृढ़ होती है । उदर, आमाशय, आंतो की मांशपेशियों पर दबाब पड़ता है, अंदर की गंदगी, जमा मल अपना स्थान छोड़ता है। कब्ज़, पाचन ठीक होता है। नसों के खिंचाव से पिंडलियां व घुटनो के दर्द ठीक होता है। रक्त का संचार ठीक से होता है । क्रोध शांत होता है। इसे अवश्य करना चाहिए।
