रतोईया नदी का रेलिंग तोड़कर हाइवा पलटा। सूत्रों ने कहा कि चालक द्वारा संतुलन खोने से यह घटना घटी। चालक वाहन के खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर निकला। हाइवा शहर के गिरिहिंडा की बताई गई है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
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बिहार राज्य के रोहतास ज़िला के चेनारी प्रखंड से यशवंत कुमार पाल ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि चेनारी प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गाँव में 16 उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए है लेकिन यह केवल शोभा की वस्तु बन कर रह गए है। बीमारी अवस्था में जब ग्रामीण उप स्वास्थ्य केंद्र जाते है तो ताला लटका हुआ पाते है। मज़बूरन निजी अस्पताल में इलाज करा कर उनका भारी पैसे खर्च हो जाते है। लगभग एक महीना से उप स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटका हुआ है। एएनएम से पूछने पर पता चला कि पोलियो ,खसरा आदि का टीकाकरण चल रहा है जबकि चिकित्सा पदाधिकारी से पूछने पर उन्होंने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र में केवल दो दिन टीकाकरण किया जाता है
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बिहार राज्य से रामाशीष कुमार की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से कृष्णा कुमार से हुई। कृष्णा कुमार 'मेरा मुखिया कैसा हो 'कार्यक्रम के तहत कहते है कि वो उन्ही व्यक्ति को मुखिया पद पर देखना चाहेंगे जो शिक्षित हो और गाँव का विकास के लिए कार्य करे
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जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सत्येंद्र प्रसाद ने बताया कि जिला के जिन जिन क्षेत्रों में नए-नए कोविड संक्रमित मरीज मिल रहे हैं ।उन क्षेत्रों को प्रतिबंधित किया जा रहा है ।इसके लिए पोस्टर चिपका कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि संक्रमित क्षेत्रों में आना जाना बंद करें। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बिहार राज्य के शेखपुरा ज़िला के अरियरी प्रखंड के मेहसौना ग्राम से दीपक की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से धर्मेंदर कुमार से हुई। धर्मेंदर कुमार ने बताया कि आपसी मामले को लेकर उनपर एफआईआर दर्ज़ हुआ था जिस कारण उन्हें कोर्ट के द्वार पर जाना पड़ा। वक़ील के माध्यम से उन्हें पता चला कि धर्मेंदर पर एफआईआर दर्ज़ हुआ है। अगर लोगों को मुकदमा दर्ज़ आदि करने की स्थिति होती है तो लोग अन्य ग्रामीणों से ही सलाह मशवरा करते है। सामाजिक कार्यकर्त्ता होने के कारण व कोर्ट आदि की जानकारी रखने के कारण लोग धर्मेंदर से भी सलाह लेते है। धर्मेंदर सलाह के तौर पर कहते है कि कोर्ट जाने में कोई फ़ायदा नहीं है केवल पैसों की बर्बादी है। जिनके पास पैसे होते है उन्हें ही कोर्ट से न्याय मिलता है।धर्मेंदर लगभग पाँच वर्षों से कोर्ट आना जाना कर रहे है,15 से 30 दिनों के अंदर कोर्ट में तारीख लगती है जिसमे वक़ीलों से संपर्क करने में ही लगभग हर महीनें 500 से 700 रूपए का खर्च पड़ता है। वक़ील फ़ीस के अलावा टिकट,वक़ालत नामा ,120 रूपए के पावर टिकट ,70 रूपए बेल बांड ,टाइपिंग का प्रति पृष्ट 25 से 30 रूपए का ख़र्च उठता है। दो तीन तारीख़ लगने के बाद ही यह अतिरिक्त ख़र्च उठता है। साथ ही कोर्ट आने जाने में ही 24 किलों की दूरी तय करनी पड़ती है इस पर भी अधिक ख़र्च हो जाता है । अपने हर एक ज़रूरी काम को छोड़ कर न्यायालय के आदेश का पालन करना पड़ता है। अगर कोर्ट में ज़्यादा समय लग जाता है तो उन्हें रात्रि भी वही काटनी पड़ती है। पाँच सालो के दौरान में गर्मी ,बरसात के कारण उनका कोर्ट में अधिक समय लग जाता था। किसी समय ऐसा भी होता था कि तारीख़ों में जाना जरूरी नहीं था परन्तु आदेशों का पालन हेतु उन्हें हाज़री देनी ही पड़ती थी और ख़र्च भी ज़्यादा पड़ता था। अगर सरकार द्वारा कोई व्यवस्था आए जिसके अनुसार बिना कोर्ट जाए घर से ही कोर्ट का काम हो जाए तो इससे समय का बचत होगा । अगर ऐसी सुविधा आती है जिसमें फ़ोन के माध्यम से केस सम्बन्धी जानकारी सुन सके तो यह व्यवस्था बहुत अच्छी होगी। अभी कोरोना काल में कोर्ट अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलती है जिससे उन्हें मालूम नहीं हो पाता है कि कोर्ट अंदर केस संबधी क्या चर्चा हो रही है। वहीं कोरोना काल से पहले भी वो केस की जानकारी व वकील और जज़ की बातें भी समझ नहीं पाते थे केवल वक़ील ही एकमात्र सहारा थे जिनके माध्यम से उन्हें केस की जानकारी मिलती थी। हर एक कार्यवाही की लिखित प्रति मिलती है परन्तु उन्हें उनके केस सम्बन्धी कोई भी ऐसी प्रति नहीं मिली अगर इसकी माँग करते है तो उन्हें कहा जाता है कि यह नकल के माध्यम से मिलेगा। इन्होने कभी नकल नहीं निकलवाया क्योंकि इनके वक़ील ही हर एक काम का देख रेख अपने स्तर से करते थे।वक़ील से अपने मुद्दों के बारे में बात करने पर वक़ीलों का कहना होता है कि नियम के अनुसार ही काम किया जाता है। उनके ग्राम के लोग कोर्ट कचहरी के काम उतना पसंद नहीं करते है। अगर ऑनलाइन माध्यम से न्यायालय का कार्य हो जिसमें केस फ़ाइल करने ,तारीखों की जानकारी ,केस रजिस्ट्रेशन ,आदेशों की जानकारी मिले तो इससे लोगों को बहुत सुविधा होगी। इससे आने जाने का किराया,समय का बचत होगा। अगर ऐसी सुविधा कोर्ट में मिले जिसमें समस्या बताने पर मुफ़्त में सलाह मिले तो इससे भी लोगों को बहुत सहूलियत होगी। वक़ील से बातचीत से उन्हें संतुष्टि नहीं होती है ,अपने फ़ायदे के लिए वक़ील मुक़दमा की समय सीमा नहीं बताते है केवल मुकदमा टालने की सोच रखते है। अन्य लोगों से सलाह लेने पर वो भी वक़ील से जानकारी मिलने की बात कहते है ,न्यायिक मामलों पर केवल वक़ील पर ही निर्भरता दिखाई जा सकती है। न्यायालय की बातों को सरलता से समझने हेतु कोई सुविधा आयेगा तो लोग खुश रहेंगे। न्यायालय में उनके कार्यो का अनुभव बताते हुए धर्मेंदर कहते है कि सबसे ज़्यादा परेशानी आने जाने में होती है ,ज़ज के बैठने का समय नहीं होता जिस कारण उनका कभी कभी पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। समय की बर्बादी को रोकने के लिए अगर घर बैठे न्यायालय का कार्य होने में ज़्यादा पैसे भी लग जाए तो कोई आपत्ति नहीं होगी।
चेनारी प्रखंड से अलग-अलग गाँवों से वोलियंटियर आए और जन अधिकार केंद्र के ऑफिस में बिहार मोबाइल वाणी न्यूज़ एक्सप्रेस के बारे में चर्चा की गई। उनको अच्छे तरीके से ट्रेनिंग दी गई कि आप किस तरह से लोगों के बीच जाकर के लोगों की समस्या और लोगों के सुनने के लिए प्रेरित करेंगे
