नालंदा में चलाया गया गौरैया संरक्षण अभियान बिहारशरीफ 15 मार्च (हि.स.)|गौरैया अतीतकाल से परिवार का अंग रहा है।कभी गौरैया की चहचहाहट से हमारे घर-आंगन पुलकित हुआ करते थे।किसानों द्वारा उपजाये गये धान व गेहूं की बाली उनके लिए घरों में टांग दिये जाते थे।मौजूदा समय में तेजी से हो रहे विकास, जलवायु परिवर्त्तन, प्रदूषण के कारण अब यह चिड़िया विलुप्त की कगार पर है। इसे बचाना होगा। इसके सबों को मिलकर सोच बनानी है।ये बातें गौरैया संरक्षण अभियान के संस्थापक राजीव रंजन पांडेय ने मंगलवार को गढ़ महादेव मंदिर के पास अभियान के दूसरी वर्षगांठ पर कहीं।दर्जनों लोगों के बीच घोंसले बांटे।पूर्व स्टेशन प्रबंधक मंतोष कुमार मिश्रा ने कहा कि राजगीर अपने आप में जैव विविधताओं से पूर्ण है। नालंदा के ब्रांड एम्बेसडर डॉ. आशुतोष कुमार मानव ने कहा कि गौरैया को बचाना है तो सबको आगे आना होगा। मौके पर मन्नु प्रसाद, चन्द्रप्रकाश, मनोहर कुमार चौधरी, सुधीर चन्द्रवंशी, जीतेन्द्र कुमार, विपीन कुमार झा, मनोरमा रानी, उषा, अमरेश सिंह सहित अन्य मौजूद थे।अभियान के संस्थापक राजीव रंजन पांडेय ने अब तक विभिन्न जिले में एक हजार से अधिक घोंसले बांट चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश किसानों का देश है। गौरैया का गाय और गोबर से काफी करीबी रिश्ता है। गोबर में अधपचे अनाज होते हैं। इसे गौरैया बड़े चाव से खाती है। इसिलिए नालंदा में गौरैया संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है| हिन्दुस्थान समाचार /प्रमोद
