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मध्य प्रदेश राज्य के शिवपुरी जिला से श्याम लाल लोधी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बेटियों को कम अधिकार दिए जाते हैं, बेटों को अधिक दिया जाता है। बेटियों को समान अधिकार मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना बेटियों के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है

दोस्तों, भारत के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट से यह पता चला कि वर्तमान में भारत के करीब 6.57 प्रतिशत गांवों में ही वरिष्ठ माध्यमिक कक्षा 11वीं और 12वीं यानी हायर एजुकेशन के लिए स्कूल हैं। देश के केवल 11 प्रतिशत गांवों में ही 9वीं और 10वीं की पढ़ाई के लिए हाई स्कूल हैं। यदि राज्यवार देखें तो आज भी देश के करीब 10 राज्य ऐसे हैं जहां 15 प्रतिशत से अधिक गांवों में कोई स्कूल नहीं है। शिक्षा में समानता का अधिकार बताने वाले देश के आंकड़े वास्तव में कुछ और ही बयान करते हैं और जहां एक तरफ शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति समाज की प्रगति का संकेत देती है, वहीं लड़कियों की लड़कों तुलना में कम संख्या हमारे समाज पर प्रश्न चिह्न भी लगाती है? वासतव में शायद आजाद देश की नारी शिक्षा के लिए अभी भी पूरी तरह से आजाद नहीं है। तब तक आप हमें बताइए कि * ------क्या सच में हमारे देश की लड़कियाँ पढ़ाई के मामले में आजाद है या अभी भी आजादी लेने लाइन में खड़ी है ? * ------आपके हिसाब से लड़कियाँ की शिक्षा क्यों नहीं ले पा रहीं है ? लड़कियों की शिक्षा क्यों ज़रूरी है ? * ------साथ ही लड़कियाँ की शिक्षा के मसले पर आपको किससे सवाल पूछने चाहिए ? और इसे कैसे बेहतर बनाया जा सकता है ?

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स्कूल जाने की उम्र में बच्चे बीन रहे कबाड़

मध्यप्रदेश राज्य के शिवपुरी जिला से गणेश खेड़ा मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि पिछोर तहसील के ग्राम चिरवाई के प्राथमिक विद्यालय में नहीं बंट रहा है मध्याह्न भोजन। मोबाइल वाणी से निवेदन है की विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंटवाने की कृपा किया जाये

मध्यप्रदेश राज्य के शिवप्रि जिला से अनुराग पटेरिया मोबाइल वाणी के माध्यम से प्राण सिंह से साक्षात्कार लिया है जसमें उन्होंने स्कूल के बारे में बताया है कि ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में सही से कोई व्यवस्था नहीं की गयी है मध्यान भोजन की।

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आरटीई बदल सकती है लॉटरी की तारीख।

रोजगार के समान अवसर नहीं।