गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के बेको पूर्वी पंचायत के सुंदरूटांड निवासी तुलो महतो के 32 वर्षीय पुत्र नारायण महतो का शव 12 दिनों से जार्डन में अस्पताल के मार्चरी में ही रखा पड़ा हैं।कंपनी के द्वारा उचित मुआवजे नहीं मिलने से परिजन शव को लेने से इंकार कर रहें हैं।बताते चलें कि 13 सितम्बर 2020 को जार्डन में नारायण महतो की मौत हो गयी थी।नारायण महतो के शव को लेकर पत्नी हेमंती देवी ने सरकार से गुहार लगायी थी।मृतक प्रवासी मजदूर चार भाईयों में सबसे बडे थे।इनके एक पुत्र मिथलेश कुमार 11 वर्ष व एक पुत्री मधु कुमारी 8 वर्ष की है। वही मृतक प्रवासी मजदूर नारयण महतो के चाचा चन्द्रदेव महतो ने बताया की कम्पनी के द्वारा इनकी मौत हृदय गति रूकने से बता रही है।इन्होंने बताया कि इनके साथ कार्य कर रहे अन्य मजदूरों ने बताया कि इनकी मौत कार्य करने के दौरान टावर में करंट लगने हुई है।और वहां से टावर में झुलते हुए तस्वीर भेजी गई है। इन्होंने बताया कि जबतक कम्पनी के द्वारा हमे उचित मुआवजे नही देगी तबतक शव नहीं रिसिव नहीं करेगें।बताते चले कि परिवार की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए ढाई वर्ष पूर्व नारायण महतो केईसी ट्रांसमिशन कंपनी में काम करने जार्डन गया था।जहां 13 सितम्बर 2020 को टावर में कार्य करने दौरान करंट लगने से मौत हो गई। लेकिन आज तक कंपनी वाले मौत का कारण आकस्मिक बता रहीं हैं।जबकि पता चल रहा हैं कि उसकी मौत काम के दौरान टावर में करंट लगने से मौत हुई हैं।
