राज्य झारखंड ज़िला धनबाद से बीरबल महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि आजादी के बाद हमारा देश विकास की ओर बढ़ रहा था।और जब बिहार से अलग होकर झारखंड अलग राज्य बना तो 2010 में पहली बार हमारे झारखंड पंचायती राज्य बना।फिर पंचायतों में लोगों ने मुखिया प्रतिनिधि चुना।परन्तु जिस उद्देश्य से पंचायती राज्य का गठन किया गया उस प्रकार से विकास देखने को नहीं मिल रहा है।कहीं-कहीं पर विकास के नाम पर लोगो को ठगा जा रहा है।यहाँ तक की प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत लाभुकों से मुखिया लगभग बीस पच्चीस हजार रुपये ऐंठ लेते है।इस कारण से विकास तो नहीं लेकिन विनाश अवश्य हो रहा है।दूसरी बात यह है की ग्राम-सभा में सभी लोगों की बातों को नहीं सूना जाना है।महीने ने कम-से-कम एक बार होनी चाहिए, परन्तु ऐसा नहीं होता है।साल में एक बार दो बार ही मुखिया प्रतिनिधि गिने-चुने लोगों को लेकर बैठक करते है और इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं होती है।अतः इसपर ध्यान देने की जरुरत है
