राज्य झारखण्ड के जिला धनबाद के प्रखंड बाघमारा के महुदा पंचायत से राधू राय जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के पालन करने की जरुरत है।भारत से निरक्षरता को दूर करने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम बना है।जो काफी धीमी गति से झारखण्ड के जिलों में चल रहा है। 6 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे जो विद्यालय से बाहर है, जो अनपढ़ है उन्हें इस अधिनियम के तहत साक्षर बनाना जरुरी है। और यह बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है।सरकार शिक्षा में सबसे ज्यादा बजट बना कर खर्च भी कर रही है। सरकार ने इस अधिनियम के तहत स्कूली बच्चों को छात्रवृति ,पोशाकें,किताबे ,मध्यान भोजन ,साइकिलें इत्यादि अनेक सुविधाएं दे रखी है।इसलिए स्कूलों के भवनों की संख्या में भी बढ़ोतरी कर पक्के भवन बनाये जा रहे है। पर उस हिसाब से शिक्षा में बढ़ोतरी नहीं हो रही है।जो की चिंता की बात है।हर बच्चे को साक्षर बनाने के लिए पारा शिक्षकों की भी नियुक्ति विद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से की गयी है।वर्तमान में कई स्कूलों में शिक्षकों के सेवानिवृति के बाद शिक्षकों के कई पद रिक्त हुए है।सरकार को यदि निरक्षरता दूर करना है, तो शिक्षकों की बहाली जल्द करनी होगी।और समय-समय पर स्कूलों की निगरानी जाँच भी करनी होगी । उच्च अधिकारियों की निगाह भी वैसे स्कूलों पर भी होनी चाहिए जहां के शिक्षक लापरवाह है। तभी जाकर शिक्षा की स्थिति में सुधार होगी और शिक्षा दर में बढ़ोतरी होगी।
