राधू राय,जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि गम के मारे किसान बेचारे बन गएँ हैं । भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी के नारे आज भी प्रासंगिक है उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया था। वे कहते हैं कि जिस तरह देश की सीमा पर देश के जवान कड़ी धुप में तमाम तरह के तकलीफो को झेलकर भारत की रक्षा करते है और हम सभी चैन की नींद सोते है।ठीक उसी तरह देश के किसान हमारे लिए कठिन परिश्रम कर फसलों को उगाते है जिसे खाकर हम जिन्दा रहते हैं। लेकिन विडम्बना यह है कि इस कृषि प्रधान देश में भी यहां के किसानो की खेती पूरी वर्षा पर ही निर्भर होती है। जब वर्षा होती है ,तो किसान फसल उपजाते है और अगर किसी कारणवश वर्षा नहीं होती है तो खेती भी नहीं हो पाती।जिससे किसानों की मेहनत,परिश्रम और पूँजी पर पानी फिर जाता है।यह एक वजह है कि किसान गहरी चिंता में दुब जाते और कई बार वे नशे का शिकार हो जाते है।क्योकि वे ऋण लेकर खेती करते हैं और और फसल ख़राब होने के कारण वे महाजन से ऋण को भी चुकता नहीं कर पाते हैं।और कई बार महाजनो के दबाव में आकर किसान आत्म हत्या तक करने लग जाते है। बावजूद इसके सरकार की ओर से उचित सिंचाई उपकरण की व्यवस्था नहीं होती है और अगर होती है भी तो भरस्टाचार के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाते है।फसल बीमा की राशि सही समय पर नहीं मिलना,समय पर खाद और बीज का लाभ नहीं मिल पाना किसानो की परेशानी का कारण बन गया है। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार के तर्ज पर अन्य परदेशो में भी किसानो के ऋण माफ़ करने की जरुरत है
