विद्यापतिनगर प्रखंड क्षेत्र में कम बारिश होने के चलते धान के खेतों में दरारें फटनी शुरू हो गई हैं। धान की सूखती फसल को देखकर किसान परेशान हैं। बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। कुछ किसानों ने तो किसी तरह पानी की व्यवस्था करके धान की रोपनी तो कर दी, लेकिन अब फसल पर संकट खड़ा हो गया है। महंगाई की दौर में पंपसेट के सहारे धान की रोपनी व खाद का इंतजाम करने में किसानों की जेब इस कदर ढीली हो गई है कि अब धान की फसल में पानी देना उनके वश में नहीं रह गया है। सूख रही धान की फसल को बचाए रखने के लिए कोई उपाय भी नजर नहीं आ रहा हैं। नलकूप बरसों पहले ही धोखा दे चुका है। ऐसे में किसानों को समझ में नहीं आ रहा है कि वह अपने खेतों की सिंचाई कैसे करें। पिछले वर्ष अच्छी खासी बरसात होने की वजह से धान की पैदावार भी अच्छी हुई थी। भले ही गेहूं की फसल में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन इस बार मौसम की मार सीधे किसानों पर पड़ रही है। जिस समय मूसलाधार बारिश होनी चाहिए उसी समय सूखे की आसार दिखने लग गया है ।खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
