विद्यापतिनगर। इस्लाम धर्म में माह-ए-रमजान का खासा महत्व है, इसी कारण शुक्रवार को जमात उल-विदा (आखिरी जुमा) के मौके पर सैकड़ों की संख्या में रोजेदारों ने प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मस्जिदों में पहुंचकर जुम्मे की नमाज अदा की तथा अल्लाह से बरकत के लिए नेमत मांगी। जुमा के दिन नमाज के लिए सबसे अधिक भीड़भाड़ मऊ बाजार स्थित मस्जिद में दिखा, जहां दोपहर 12 बजे से ही आखिरी जुमा की नमाज के लिए लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, इसके अलावा ईद उल फितर के अवसर पर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में अवस्थित मस्जिदों में आखिरी जुमे की नमाज अदा करने के लिए सैकड़ों की संख्या में मुस्लमानों ने दोपहर में इकट्ठा होकर एक साथ नमाज अदा कर एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया। इस संबंध में मोहम्मद इबरार ने बताया कि जमात उल-विदा रमजान के पवित्र माह के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है। इस वर्ष रमजान का महीना 25 मार्च से शुरू हुआ था, जो 22 अप्रैल को ईद उल-फितर मनाने के साथ समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि जमात उल-विदा रमजान के महीने के आखिरी शुक्रवार को कहा जाता है। किसी भी मुस्लिम के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण दिन माना जाता हैं, ऐसी मान्यता है कि इस आखिरी पवित्र जुमा के दिन अल्लाह का एक दूत (फरिश्ता) पृथ्वी पर उतरता है और सभी की प्रार्थनाओं पर ध्यान देने के लिए मस्जिद में प्रवेश करता है। दरअसल रमजान का पूरा माह ही बहुत पवित्र होता है, जो हमें मानवता के साथ कृतज्ञता दिखाने, दयालु होने और दान-धर्म की सीख देता है। बहुत से लोग मानते हैं कि जमात उल विदा का रोजा रखने बेहद शुभ होता है। यहां तक कि जो लोग पूरे महीने रोजा रखने में किसी वजह से असमर्थ होते हैं, वे भी इस एक दिन रोजा रखते हुए रोजा के सारे नियमों का पालन करते हैं। नमाज़ अदा करने के बाद हदीस शरीफ ने बताया गया है कि जुमे के दिन ही हजरत आदम अलैहिस्सलम को जन्नत से दुनिया में भेजा गया था और जुमे को ही उन्होंने जन्नत में वापसी की थी। जुमे की नमाज अदा करने से पिछले हफ्ते के पापों से मुक्ति मिलती है। एक जुमे की नमाज अदा करने से 40 नमाज अदा करना का सबब मिलता है।