लोक आस्था के इस महापर्व पर गंगा जल का खास महत्व होता है. क्योंकि पूजा का प्रसाद गंगाजल में ही बनाया जाता है। नहाय खाय के दिन चने की दाल, अरवा चावल, लौकी की सब्जी बनायी जाती है। व्रति महिलाओं ने बताया कि 28 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ इस पावन त्योहार की शुरुआत हो रही हैं। इसके बाद 29 को खरना और 30 अक्टूबर को पहला अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। 31 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस त्योहार का निस्तार किया जाएगा। भगवान भास्कर की आराधना के लिए किया जाने वाल यह महापर्व शुक्रवार से नहाय खाय यानी कद्दू भात से शुरू हो गया। नहाय खाय को लेकर विद्यापतिनगर में भी सैकड़ों महिलाओं ने गंगा स्नान कर तन व मन को शुद्ध किया। गंगा स्नान के बाद व्रती गंगा जल लेकर अपने घरों के लिए रवाना हुई। गंगा स्नान के लिए कष्टहरणी गंगा घाट पर सर्वाधिक भीड़ नजर आई। सुबह से ही गंगा स्नान के लिए गंगा तट पर जुटने लगे। दूरदराज के लोग गंगा स्नान के लिए अपने निजी वाहन या किराए के वाहन को लेकर आए थे। जिसे बांध के नीचे रोककर गंगा स्नान के लिए लोगों को आते-जाते देखा गया।
