विद्यापतिनगर। एक तरफ राज्य सरकार पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और उन्हें पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने को लेकर पोशाक, किताब, छात्रवृत्ति, साइकिल आदि की राशि देकर आर्थिक मदद करती है तो दूसरी ओर जिन कंधों पर बच्चों को शिक्षा दिलाने की जिम्मेदारी है, वही कंधा बच्चों को पढ़ाई से दूर कर उन्हें उनकी प्राथमिक शिक्षा से महरूम कर देता है। सरकार की मुकम्मल कोशिशों के बावजूद पढ़ाई से वंचित होने के कारण नौनिहालों का भविष्य अधर में लटक जाता है। प्रखंड की मनियारपुर पंचायत में विद्यालयों की स्थिति की पड़ताल की तो वहां के शिक्षकों और पढ़ाई की कलई खुल गई। कुछ स्कूलों में 15 दिन भी पढ़ाई नहीं होती। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति पूर्ण है लेकिन विद्यालय से शिक्षक अक्सर गायब रहते हैं। विद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि विद्यालय में एक शिक्षक दो शिक्षिका नियुक्त हैं। दोनों शिक्षिका रोजाना हाजिरी बनाकर घर चले जाते हैं, जिससे गांव के बच्चे शिक्षा से वंचित रह जा रहे हैं। वहीं गांव के उपमुखिया सूरज पासवान ने कहा कि गांव के बच्चों में पढ़ाई के प्रति जबरदस्त उत्साह है लेकिन शिक्षकों के गलत कार्यप्रणाली से उसकी शिक्षा बाधित हो रही है। गरीब छात्र कहीं और निजी स्कूलों में भी नहीं जा सकते हैं। सरकारी स्कूलों में बहुत ही स्थित खराब है। ग्रामीण क्षेत्र रहने के कारण शिक्षक समय से पहले हाजिरी बनाकर अपने घर चले जाते हैं।