राष्ट्रीय संगीतज्ञ परिवार के तत्वावधान में "डुमराव घराने का ध्रुपद परंपरा"विषय पर राष्ट्रीय संगीत संवाद कार्यक्रम का आयोजन संस्था के निदेशक पंडित देवेंद्र वर्मा के नेतृत्व में वेबीनार के माध्यम से संध्या 6:00 बजे शुरू किया गया। वेब सेमीनार का सफल संचालन व संयोजन राजकीय विदर्भ इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड ह्यूमैनिटीज की संगीत विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) पूर्णिमा दिवासे ने की।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रखर शास्त्री गायक व भारत सरकार के पदाधिकारी सुधीर मलिक ने संगीत के आगरा आगरा घराने व अन्य घराने के बारे में जानकारी को साझा किया व नौरंग,चतुरंग,त्रिवट के अतिरिक्त सप्तरंग की भी चर्चा की। अतिथि विषय विशेषज्ञ के रूप में डुमराव ध्रुपद घराने के प्रसिद्ध गायक पंडित रामजी मिश्र ने ध्रुपद गायकी के डुमराव घराने व अन्य घराने में अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा की सामवेद से धुर्वा गीत का सृजन सा ग प पदों से हुई ।इसी से प्रेरित होकर डुमरांव घराने में तीन स्वरों के राग का सृजन हुआ,जिसमें गोरहरवाणी,खंडहारवाणी,नौहारवाणीहर का समावेश है। उन्होंने विभिन्न बंदिशों,राग, रसो को समेटते हुए गायन की प्रस्तुति की। बैठक को डॉक्टर अलकनंदा तुलजापुरकर महाराष्ट्र,प्रोफेसर लावण्या कृति सिंह काव्या दरभंगा,डॉ बाला लखेंद्र बीएचयू बनारस,डॉक्टर जसवीर कौर पंजाब,डॉ अवधेश तोमर,डॉक्टर भगवान दास मानिक, डॉ मधु शर्मा,डॉक्टर महेंद्र प्रसाद शर्मा बमबम,डॉ अमिता शर्मा,पंडित सतीश बोहरा जोधपुर,बिहार के समस्तीपुर से मुकेश कुमार एवं मंगलेश कुमार सहित दर्जनों संगीत प्रेमी व संगीतज्ञ ने विचारों का आदान प्रदान किया। अंत में संस्था के महासचिव सुसमय मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।पूरी जानकारी के लिए लिंक को अभी क्लिक करें।
