शीर्षक:- "हिंदी भारत के माथे की बिंदी" हिंदी भारत के माथे की बिंदी, विश्व के नभ पर उदितमान रहे, भारत के भाव में बसने वाली हिंदी, तुझ पर गर्वित यह हिंदुस्तान रहे। देववाणी संस्कृत भाषा तेरी जननी, मां की तरह तेरा भी विश्व में मान रहे, भारत के भाव में बसने वाली हिंदी, तुझ पर गर्वित यह हिंदुस्तान रहे। भारत की संस्कृति में बसी भारत की बेटी, हम भारतीयों को तुझ पर अभिमान रहे, भारत के भाव में बसने वाली हिंदी, तुझ पर गर्वित यह हिंदुस्तान रहे। सरल, सरस, सहज, सुमधुर, सुंदर, तेरे हर रूप की बढ़ती सदा शान रहे, भारत के भाव में बसने वाली हिंदी, तुझ पर गर्वित यह हिंदुस्तान रहे। कवियों की वाणी, रस छंदों की भाषा, हर युग में तेरी अपनी एक पहचान रहे, भारत के भाव में बसने वाली हिंदी, तुझ पर गर्वित यह हिंदुस्तान रहे। रंजना लता ( नर्स)
