मनरेगा-7 दिसंबर 2005 को विधान द्वारा अधिनियमित यह योजना गांव में रहने वाले मजदूरों को रोजगार उपलब्ध करवाने हेतु शुरू किया गया था लेकिन मोहिउद्दीन नगर में या हाथी का दांत साबित हो रहा है। मोहिउद्दीन नगर प्रखंड में ऐसे ऐसे लोगों के नाम पर मनरेगा मद से सरकारी राशि की निकासी फर्जी तरीके से की जाती है घर से ही नहीं निकलते हैं। दूसरी तरफ जिन मजदूरों के नाम पर रोजगार न देकर फर्जी तरीके से उनके नाम पर फर्जी तरीके से राशि की निकासी की जाती है उस मजदूर को मात्र ₹200 देकर के ठेकेदार के द्वारा राशि की निकासी के बाद घर भेज दिया जाता है यह उच्च स्तरीय जांच अगर करवाई जाए तो सच्चाई उजागर भी होगी लेकिन जांच होगी ही नहीं।इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।