राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के कुलपति महानुभाव विश्वविद्यालय के प्रांगण में हर जगह कुछ न कुछ भवन निर्माण कराने के लिए जगह की खोजबीन में लगे रहते हैं। चर्चा है कि किसी भी तरह की काउंसिल की मीटिंग में सदस्यों द्वारा नए- नए निर्माण कार्यों की हामी भरवाकर के भवनों का निर्माण कराने में व्यस्त हो जाते हैं ताकि अधिक से अधिक धन अर्जित कर सके। इस प्रक्रिया में इंजीनियर सुमंत और डाॅ. एस.के.जैन का कुलपति को भरपूर सहयोग प्राप्त होता है। इसी क्रम में राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा विद्यापीठ प्रांगण में रह रहे लोगों को विस्थापित करके सभी क्वाटर्स तोड़ कर वहां पर hostel बनाने का काम कुलपति के द्वारा कराया जा रहा है। उस प्रांगण में जितने भी पेड़ पौधे थे उनको जड़ से उखाड़ कर के किसान घर के आस-पास के जगहों पर लगाया गया। चर्चा है कि इसमें बड़े स्तर पर इंजीनियर सुमंत द्वारा धांधली की गई। जैसे कि चुनिंदा कंपनियों से Quotation मंगवाकर इंजीनियर सुमंत द्वारा पूरी प्रक्रिया को कुलपति के मौखिक निर्देशानुसार मैनेज कर लिया गया और इसका मूल्य ज्यादा से ज्यादा फिक्स किया गया जो कि प्रत्येक पेड़ के विस्थापन के लिए 90 हजार से 1 लाख के बीच में खर्च किए गए । तथा इस प्रक्रिया द्वारा किसान घर के आस-पास विघापीठ के कुल 14 पेड़ लगाए गये जिनमें से 08 पेड़ सूख गए...कुल लागत के अधिकतर हिस्से का इंजीनियर सुमंत ने कुलपति और अपने बीच में कमीशनखोरी की तथा इस कमीशनखोरी के चक्कर में पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाकर अपनी- अपनी जेब भारी किए। इसके खिलाफ इन दोनों पर वन विभाग द्वारा उचित कार्रवाई की मांग की जाती है। साथ ही भ्रष्टाचार उन्मूलन के तहत भी कार्रवाई की मांग की जाती है।
