पैक्स, इसका गठन सरकार के द्वारा किसान के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्यों में पूर्ण सहयोग देने के लिए किया गया था लेकिन वर्तमान समय में पैक्स सिर्फ और सिर्फ अपने पदाधिकारियों अपने सदस्यों एवं अपने अध्यक्ष के लिए घोटाला करने का जरिया बना हुआ है, इसमें अगर धान की खरीद होती है तो आपको जानकारी दें कि सिर्फ आठ 10 किसानों के नाम पर सैकड़ों क्विंटल धान की खरीद कर ली जाती है और वह खरीद सिर्फ कागज पर की जाती है कागज पर ही वह मिल में जाता है चुकी जिन लोगों के नाम पर धान की खरीद की जाती है उनके द्वारा कुछ पैसा काट कर के बाकी सभी पैसा पैक्स अध्यक्ष को दे दिया जाता है जिससे उनको सिर्फ एक फसल की खरीद में 25 से 30 लाख रुपए का बेनिफिट होता है और इसमें सभी पदाधिकारियों का हिस्सा भी होता है अगर ऐसा नहीं होता तो इस कदर लूट खरसोद नहीं हो रहा होता। मोबाइल बानी के माध्यम से मैं किसानों से अपील करना चाहता हूं कि आप लोग इसके खिलाफ आवाज उठाने और सरकार से मैं आशा करता हूं की किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पैक्स अध्यक्षों के द्वारा किए गए व्यापक घोटाले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की दिशा में पहल करेंगे।
