समस्तीपुर। शिशु को जन्म के तत्काल बाद से कम से कम छ: माह तक हर मां को स्तनपान कराना चाहिए। माँ का दूध, बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार माना जाता है क्योंकि माँ का दूध ही बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए सभी जरूरतें पूरी करता है। उक्त बातें स्तनपान जागरूकता सप्ताह के समापन के मौके पर रोटरी क्लब ऑफ समस्तीपुर सिटी की सेक्रेट्री डॉ कनुप्रिया मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि माँ के दूध में आवश्यक पोषक तत्व, खनिज, विटामिन, प्रोटीन, वसा, एंटीबाडीज और ऐसे प्रतिरोधक कारक मौजूद होते हैं, जो नवजात शिशु के सम्पूर्ण विकास और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। बताते चलें कि आरसी समस्तीपुर के द्वारा प्रेसिडेंट डॉ अमृता कुमारी की अध्यक्षता में फिजिकल डिस्टेंस सहित तमाम सावधानियों का पालन करते हुए स्तनपान जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं के स्तनपान से जुड़ी आशंकाओं, व भ्रांतियों का निवारण करते हुए स्तनपान के लिए उन्हें जागरूक किया गया। शनिवार को समापन सत्र के दौरान रोटेरियन डॉ आरके मिश्रा ने महिलाओं में स्तनपान से कतराने या बचने की बढ़ती प्रवृति पर चिंता जताते हुए कहा कि स्तनपान माँ और शिशु दोनों के लिए लाभदायक होता है। विटामिन ए एवं एंटीबॉडीज युक्त कोलोस्ट्रम, नवजात शिशुओं के विकास में मदद करता है वहीं माँ के दूध में मौजूद प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम आदि तत्व शिशु के शारीरिक विकास में मदद करते हैं। माँ के दूध में उच्च प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक तत्व मौजूद होते हैं जो शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। आरसी समस्तीपुर की सेक्रेट्री डॉ मिश्रा ने कहा कि स्तनपान से प्रोबियोटिक मिलते हैं, जो शिशु के पाचन तंत्र में इंफेक्शन दूर करते हैं माँ के दूध में लांगचेन पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं, जो शिशु के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माँ का दूध, शत प्रतिशत सुरक्षित है, इसलिए स्तनपान करने वाले बच्चों में एलर्जी की संभावना कम होती है। मां के दूध में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और कैल्सियम बेहद संतुलित मात्रा में होते हैं। जिस से शिशु के शरीर में प्रोटीन और विटामिन की कमी नहीं होती है तथा कैल्शियम शिशु के हड्डियों को मजबूत करने का काम करते हैं वहीं माँ के दूध में डी.एच.ए. होता है, जिससे आगे चलकर बच्चे की दृष्टि भी तेज होती है। उन्होंने कहा कि सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के खतरे को कम करने में मदद करता है। नई पीढ़ी में स्तनपान कराने से शारीरिक विकृति आने की भ्रांति को बेबुनियाद और निराधार बताते हुए डॉ कनुप्रिया मिश्रा ने कहा कि स्तनपान धत्री माताओं के वजन कम करने में सहायक होने के साथ साथ ब्रैस्ट और ओवेरियन कैंसर के खतरे को भी कम करता है। उन्होंने कहा कि जब माँ, अपने शिशु को स्तनपान कराती है तो उसका शरीर लगभग 450 से 500 कैलोरी खर्च करता है, इससे प्राकृतिक ढंग से वजन कम करने मे मदद मिलती है। इन सबके अलावा स्तनपान माँ और शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ते को मजबूत करता है। इस अवसर पर डॉ मिश्रा ने स्तनपान कराने वाली माताओं को अपने खाने का खास ख्याल रखने की नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें प्रोटीन व फाइबर युक्त पोषक व संतुलित आहार ग्रहण करना चाहिए। क्योंकि इस वक्त वह जो भी खाती है उसका असर उनके दूध उत्पादन क्षमता और बच्चे स्वास्थ्य व विकास पर पड़ता है। मौके पर सभी रोटेरियन और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
