उक्त चर्चाएँ वीमेन्स कॉलेज, समस्तीपुर के अर्थशास्त्र विभाग के विभाग प्रमुख के संयोजन में आयोजित एकदिवसीय वेबिनार के दौरान विभिन्न वक्ताओं के उद्बोधन में सामने आई “बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 और बाढ़ का प्रभाव” विषय पर आयोजित इस वेबिनार मे रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रो. राज किशोर झा, पूर्व कुलपति, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा, ने कहा कि कोविड-19 और बाढ़ ने बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत ही नकारत्मक रूप से प्रभावित किया है। जब तक बिहार को केन्द्रित होकर योजना नहीं बनती तब तक बिहार का विकास नहीं हो सकता। वहीँ प्रो. नागेश्वर शर्मा, संयुक्त सचिव, भारतीय आर्थिक परिषद ने बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए वोकल फॉर लोकल को सही बताया। उन्होने कहा कि इस बाढ़ और कोरोना के संकट में राजनीति हो रही है। बिहार के पिछड़ेपन के लिए बिहार की राजनीति जिम्मेदार है। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रो. राम भरत ठाकुर, पूर्व विभागाध्यक्ष ,विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा ने कहा कि यदि बिहार में नदी से नदी जोड़ो परियोजना होती तो एक साथ बाढ़ और सुखार से निजात पा जाते। अप्रवासी श्रमिक जो लगभग 20-25 लाख की संख्या में है, उनकी स्थिति दयनीय है। बिहार मे औद्योगिक संरचना कमजोर होने के कारण आत्मनिर्भर भारत अभियान योजना का प्रभाव नकारात्मक ही देखने को मिलेगा। इस वेबिनार में देश के कई राज्यों से लगभग 750 शिक्षाविद, प्रोफेसर,रिसर्च स्कॉलर, छात्र आदि गूगल मीट एवं यूट्यूब के माध्यम से शामिल हुए और विशेषज्ञ से प्रश्न भी किये। प्रधानाचार्ज डॉ. शंभू कुमार यादव इस कार्यक्रम के संरक्षक ने सभी अतिथि को स्वागत किया और इस विषय पर सेमिनार को प्रासंगिक बताया। संयोजक डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने विषय को प्रवेश कराते हुए बिहार की गाँव के ज्वलंत समस्याओं को रखा। धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. रिंकी कुमारी ने किया।