डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कृषि विशेषज्ञ डॉ गोपाल सिंह एवं नोडल पदाधिकारी डॉ ए सत्तार ने किसान भाइयों के लिए समसामयिक सुझाव जारी किए है। किसान भाइयों. किसान भाइयों पिछले दिनों में उतर बिहार में भारी से अतिभारी वर्षा हुई है जिसके कारण खेतों में पानी का जमाव हो गया है। अतः सबसे पहले अपने खेतों से पानी के निकास की उचित व्यस्था करे। मौसम पूर्वानुमान की अवधि में वर्षा की संभावना को देखते हुए आम के पौधों की उम्र ( १० वर्ष से अधिक ) के अनुसार फलन समाप्त होने के बाद अनुशंसित उर्वरको जैसे १५-२० किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद , १.२५ किलोग्राम नेत्रजन , ३००-४०० ग्राम फॉसफोरस , १.० किलोग्राम पोटाश , ५० ग्राम बोरेक्स तथा १५-२० ग्राम थाइमेट प्रति पौधा प्रति वर्ष के अनुसार उपयोग करें । जिससे अगले वर्ष पौथे फलन में आ सके तथा उनका श्वास्थ अच्छा बना रहें । वर्षा ऋतु में उमस एवं जलजमाव के कारण बिमारियों जैसे गलघोटु , लंगड़ी बुखार , सर्रा बबेसियोसिस , पी ० पी ० आर ० , दस्त , निमोनिया इत्यादि होने की संभावना बढ़ जाती है । इनसे बचने के लिए टिकाकरण करावें एवं पशुओं को दुषित पानी या बाढ़ के पानी में भिगें चारा या दाना नहीं दें । पशुओं के पैरों को पोटाशियम परमैंगनेट या फिटकीरी के घोल से धोएँ । दुथारु पशुओं को अत्यधिक चारा दाना नहीं दें अन्यथा दस्त होने की संभावना रहती है । गाभीन गाय - भैंसो को खनिज मिश्रण ५० ग्राम प्रतिदिन दें । सर्पदंश से बचने के लिए वाड़े ( पशु गृह ) में रोशनी की समुचित व्यवस्था करें ।
