बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की आठवीं कड़ी में आइये हम सुनते हैं बाल विवाह से जुडी एक कहानी जिसका नाम है "बबली का सफर" इस कहानी में बबली और सुनीता दो सहेली अपनी दशवीं की परीक्षा का परिणाम आने पर बेहद खुश है।बबली अपने कक्षा में हमेशा अव्वल आती है। बबली पढ़ लिख कर नर्स बनना चाहती है। लेकिन बबली के परिवार वाले उसकी शादी करवाना चाहते हैं। इस बात से बबली बहुत दुःखी है, और वो अपने सहेली सुनीता से सारी बात कहती है। सुनीता के समझाने पर बबली की माँ उसे आगे पढ़ाने को तो राजी हो जाती है पर क्या बबली के पिता जी इस बात से राजी होंगे...? क्या पूरा हो पाएगा बबली का नर्स बनने का सपना जानने के लिए सुनते रहिये "बबली का सफर" दोस्तों क्या आपके अनुसार लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा का कोई महत्व है...? या फिर लड़कियों के लिए प्राथमिक शिक्षा ही काफी है।