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हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर समान अधिकार प्राप्त हो सके इस उद्देश्य से भारत सरकार ने विभिन्न कानूनों का प्रावधान किया है। जिसमे महिलाओं को दहेज, घरेलू हिंसा, श्रम में भेदभाव के खिलाफ, सम्पत्ति में हिस्सा, विवाह और तलाक आदि संबंधी कई अधिकार दिए गए हैं। लेकिन इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में आज हमारे समाज में महिलाएं भेदभाव की शिकार होती हैं। दोस्तों, आखिर क्या कारण है कि महिलाओं के पक्ष में कानून होते हुए भी वे कानून का लाभ नहीं उठा पातीं? क्या महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है ? साथ ही एक बात यह भी गौर करने वाली है कि कानून के नज़रों में बेटा और बेटी एक समान होते हैं,पर क्या वास्तव में ये अधिकार बेटों के बराबर बेटियों को मिलता है ? दोस्तों, जब एक बेटी अपनी ससुराल में रहते हुए भी कई बार अपने माता -पिता का जिम्मेदारी उठाती हैं ,तो आखिर वे पिता के सम्पति से अपना हक़ क्यों नहीं मांग सकती ? आखिर क्या वजह है कि हमारे समाज में लोग पिता के सम्पति से बेटियों को हिस्सा देने से कतराते हैं ? श्रोताओं, आप हमे बताएं कि क्या इन क़ानूनी अधिकारों के बारे में महिलाओं को जागरूक किया जाता है ? साथ ही क्या महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी विभिन्न कानूनों को सही पालन हो इसके लिए सरकार और आम नागरिकों की क्या भूमिका होनी चाहिए ?
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