जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि बिहार सरकार समय समय क्रमशःत्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओ के अधिकारों में कटौती कर रही है। 1957 में गठित बलवंत राय मेहता कमिटी के सुझाव के आलोक में प्रेषित पंचायती राज संस्था का आरंभ हुआ।संविधान में तिहत्तरवां संशोधन अधिनियम 1992 के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 247 छह में ग्यारहवीं सूची जोड़े गए।बिहार पंचायती राज नियामवली 2017 के आलोक में मुखिया के अधिकारों में कटौती की गयी।विवाह निबंधन नियामवली के तहत मुखिया को विवाह निबंधक के पद से हटाने निर्णय होने वाला है।सरकार को अगर लग रहा है कि त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्था के प्रतिनिधि सरकार का सौतेला भाई या शत्रु है तो उसे पहल कर 72वा संविधान संशोधन को निरस्त कर देना चाहिए।साथ ही मुखिया,उप मुखिया ,वार्ड सदस्य ,जिला परिषद् पदों का उन्मूलन कर देना चाहिए
