बिहार राज्य के मधुबनी जिले के खजौली से रामाशीष सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दी कि तक़रीबन तीन साल पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था की थी की पीड़ित एवं आरोपी के बीच समझौता होने के बावजूद बलात्कार एवं हत्या जैसे संगीन आरोपों में आपराधिक कर्यवाही निरस्त नहीं की जा सकती है ।सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय प्रशंसनीय था।न्यायालय के अनुसार समाज पर इसका हानिकारक एवं गलत प्रभाव पड़ सकता है।न्यायमूर्ति श्री देसाई एवं न्यायमूर्ति श्री रमण की खंडपीठ ने कहा था की दूसरे अपराध जो दो व्यक्तियों या समूह तक में सीमित हो तो दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद निरस्त किया जा सकता है लेकिन जघन्य अपराधों में नहीं।
