भीडिसीओ धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति जिसे पहले कालाजार हुआ हो और उसके शरीर के किसी भाग पर हल्के रंग के धब्बे या छोटी-छोटी गांठ दिखाई दे, जिन्हें छूने पर महसूस हो, वह पीकेडीएल का केस हो सकता है। उन्होंने बताया कि कालाजार के इलाज के लिए 4000 रुपया भारत सरकार की ओर से मदद दी जाती है। उन्होंने बताया कि पीएचसी तथा जिला वीबीडीसीओ कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी द्वारा सतत रूप से सभी भिएल/पीकेडीएल पीटी का अनुश्रवण किया जाता है। साथ ही कालाजार के मरीजों की खोज की जाती है।
