पताही: ई.संतोष कुमार निराला ने कहा यदि ब्याहूत नारी के माँग के बीचो बीच सिन्दूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यू नही हो सकती है। जो स्त्री अपने माँग के सिन्दूर को बालो से छिपा लेती है उसका पति समाज मे छिप जाता है जो स्त्री बीच माँग मेँ सिन्दूर न लगाकर किनारे की तरफ सिन्दूर लगाती है उसका पति उससे किनारा कर लेता है। यदि स्त्रीके बीच माँग मेँ सिन्दूर भरा है तो उसके पति की आयु लम्बी होतीहै। उन्होंने एक उदाहरण भी पेश करते हुए कहा रामायण मे एक प्रसंग आता है जब बालि और सुग्रीव के बीच युध्द हो रहा था तब श्री राम ने बालि को नही मारा।जब बालि के हाथो मार खाकर सुग्रीव श्री राम के पास पहुचा तो श्री राम ने कहा की तुम्हारी और बालि की शक्ल एक सी है इसिलिये मै भ्रमित हो गया अब आप ही बताइये श्री राम के नजरो से भला कोई छुप सकता है क्या?असली बात तो यह थी जब श्रीराम ने यह देख लिया की बालि की पत्नी तारा का माँग सिन्दूर से भरा हुआ है तो उन्होने सिन्दूर का सम्मान करते हुये बालि को नही मारा ।दूसरी बार जब सुग्रीव ने बालिको ललकारा तब तारा स्नान कर रही थी उसी समय भगवानने देखा की मौका अच्छा है और बाण छोड दिया अब आप ही बताइये की जब माँग मेँ सिन्दूर भरा हो तो परमात्मा भी उसको नही मारते फिर उनके सिवाय कोई और क्या मारेगा। ई. संतोंष कुमार निराला ने कहा कि यह मै इसीलिये कह रहाँ हुँ की आजकल फैसन चल रहा है सिन्दूर न लगाने की या हल्का लगाने की या बीच माँग मेँ न लगाकर किनारे लगाने की ।जो बिल्कुल सही नहीं है,नारी सभ्यता और संस्कृति को नजरंदाज कर गुमराही की शिकार होती जा रही है,इस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मैँ आशा करता हुँ की मेरे इन शब्दों से आप लोग सिन्दूर का महत्व समझ गयी होगी और अपने पति की लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थय के लिये अपने पतिके नामका सिन्दूर अपने माँग मे भरे रहेगी।इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
