घर से निकले थे तो मेरे साथ परिजनों की बड़ी उम्मीद थी कि मेरा बेटा कमाऊ है परिवार का दुख दूर होगा महाजन का कर्ज भी सधेगा लेकिन लॉक डाऊन में कंपनी बंद हो गई दोनों हाथ बेकार हो गए और हम लोग भिखारी बन गए जब कमाई का पैसा खत्म हो गया तो भोजन के लिए कतार में लगनी पडी। कई बार कतार में लगने के बाद भी भोजन नहीं मिला ठाणे मुंबई से करीब 8 घंटा विलंब से बापूधाम मोतिहारी स्टेशन श्रमिक स्पेशल ट्रेन पर सवार मजदूरों ने अपनी दर्द बयां की
