बिहार राज्य के पश्चिमी चम्पारण के वाल्मीकि नगर से पवन बिहारी चरण ने मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दी की बिहार में शराब बंदी के बाद नशेड़ियों ने नशे के लिए नए विकल्प की तलाश कर ली है।महर्षि बाल्मीकि की तपोभूमि नशे की गिरफ़्त में होने के कारण दूषित हो चुकी है।नशेड़ियों को दवा की दुकानों से नशे में तृप्त होने वाली दवाइयाँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं इसके लिए इन्हे किसी चिकित्सक की दवा की जरुरत नहीं पड़ती,हालाँकि जिस कफ़ सीरप को खाँसी ठीक करने के लिए ली जाती है उसी कफ़ सीरप को नशेड़ी बड़े पैमाने पर नशे के लिए इस्तेमाल कर रहें हैं।ये कफ सीरप दुकानदारों द्वारा उन्हें महंगे दामों में बेचा जा रहा है।पिछले महीने एस.एस.पी. ने इस नशे के कारोबार पर गहरी चोट मारते हुए लगभग 1200 बोतल कफ सीरप की बड़ी खेप को ज़ब्त कर सफलता प्राप्त की थी।जिस कैप्सूल को पेट दर्द के लिए इस्तेमाल करते हैं नशेड़ी उसी कैप्सूल को खा कर नशे का जुगाड़ कर लेते हैं। हालाँकि जानकारों की माने तो कफ सीरपों में रासायन की मात्रा अधिक होने के कारण यह नशेड़ियों की पहली पसंद है।शराब बंदी के बाद नशेड़ियों का रुझान नशे की इस विकल्प पर तेजी से हुआ है।