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उत्तरप्रदेश राज्य के जिला झाँसी से विकेश प्रजापति , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि गर्मी से मिली राहत। बुंदेलखंड के किसान भाइयों और हमारे मजदूर भाइयों के लिए राहत की सांस है। दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से लोगों को सुबह और शाम ठंडक महसूस हो रही है, जबकि लोगों ने खेतों में बादलों को देखकर खेती की तैयारी भी शुरू कर दी है। राज्य में किसान लगातार तैयारी कर रहे हैं कि क्या मौसम में नियमित रूप से बारिश होगी और किसान समय पर अपनी फसल की बुवाई कर सकेंगे।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला झाँसी से विकेश प्रजापति , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि

बहुत दिनों से लोग गर्मी से परेशान थे। जीवन अस्त व्यस्त था। लेकिन अब बारिश होने से लोगों को राहत मिली है

उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला से विकेश प्रजापति ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि भीषण गर्मी से बुंदेलखंड झुलस रहा है। लेकिन रोजी रोटी के लिए लोग बाहर निकलने को मज़बूर है। यह हमारे द्वारा ही किया गया है। हमने ही प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर इसको नुकसान पहुँचाया है। इसीलिए ऐसी आपदाओं का सामना कर रहे है। अभी के समय में पेड़ लगाना और जल को संरक्षित करना ज़रूरी है

उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला से विकेश प्रजापति ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि तापमान प्रतिदिन बढ़ रहा है । अभी देखते है कि लोग सिगरेट ,बीड़ी आदि पीकर जंगल के किनारे फेंक देते है ,जिसकी चिंगारी आग का विकराल रूप ले लेती है। यह वर्तमान में कई जंगलों में आग लगने का कारण है

उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला से विकेश प्रजापति ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि लगातार गर्मी बढ़ रही है। लोग बहुत परेशान है। घर से बाहर नहीं जा पा रहे है वहीं बिजली की समस्या भी लोगों को परेशान कर रहा है। इसका एक ही समाधान है ,वो है पर्यावरण की रक्षा करें। अगर आप एक पेड़ लगाते हैं, तो देश के करोड़ों की आबादी के हिसाब से कई पेड़ हो जाएगी। जल संरक्षण भी ज़रूरी है

आज पूरे देश में गंगा दशहरा मनाया जा रहा है।गंगा के पावन जल में श्रद्धालु स्नान कर रहे है। आज दूर दूर से श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आ रहे है। लेकिन वही पवित्र गंगा प्रदूषित है।

उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी जिला से हमारे श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मोबाइल वाणी पर जो गर्मी के विषय में कार्यक्रम चलाया जा रहा है वह बहुत अच्छा लगा

गर्मी का कहर जो बरस रहा है, लोग कहते हैं कि यह प्रकृति का देन है, लेकिन ऐसा नहीं है। हमने जो बीज बोये हैं वो ही आज अंकुरित हो रहे हैं। क्योंकि जब हमने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, जब हमने पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है, तो प्लास्टिक की जितनी मात्रा का हमने दुरुपयोग किया है, आज हमारे पास जो पर्यावरण है वह नष्ट हो गया है। यह संतुलन में नहीं है और गर्मी का इतना प्रकोप है कि लोग घर से बाहर निकलने के लिए दूभर हैं