बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी जानकारी दे रही हैं कि हमारे देश में सरकारी स्कूलों की तुलना में अधिक निजी स्कूल खोले गए हैं। निजी स्कूल सीखने का मंदिर नहीं हैं बल्कि इसे व्यवसाय बना दिया है। जो मैट्रिक तक अपनी पढ़ाई पूरी नहीं करते हैं वे भी निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने जाते हैं।वे बच्चे को अच्छी शिक्षा तो नहीं देते हैं, लेकिन यह कहकर पैसे लेते हैं कि बच्चे को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। गाँव में यह सुनकर हर कोई अपने बच्चे को निजी स्कूल में भेजने का सोचने लगते हैं। लेकिन सभी निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं होती है