सोमवार की अहले सुबह से ही दूर-दराज से श्रद्धालू आकर संगम में स्नान कर दीपदान किया। मेला को देखते हुए एक सप्ताह पूर्व से ही यहां दुकाने सजने लगी थी। मेले में भेड़ के बाल की कम्बल, लकड़ी फर्नीचर के समान, सुथनी व कचरी मेले का मुख्य आकर्षण है। पुनपुन व मदार के संगम पर भृगुधाम में ब्रह्मा के मानस पुत्र भृगुऋषि का आश्रम हुआ करता था जो अपने असीम ज्ञान व पांडित्य के लिए विख्यात थे। यहां सहस्त्रलिंगी शिवलिंग, माता नकटी भवानी का प्रसिद्ध मंदिर है जिससे इस स्थल के प्रति लोगों की काफी धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यता है।