माता भगवती की उपासना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने व्यास मुनि को पुत्र प्रदान किया:-पं. अवधेश शरण शुक्ल आचार्य हरदोई। टड़ियावां ब्लॉक के गांव सिकरोहरी में चल रहे शतचंडी महायज्ञ व देवी भागवत कथा के तीसरे दिन प्रातः वेला में कथा आचार्य अवधेश शरण शुक्ल ने शुकदेव मुनि की जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि शुकदेव मुनि महर्षि वेद व्यास के अयोनिज पुत्र थे और यह बारह वर्ष तक माता के गर्भ में रहे। कथा कुछ इस प्रकार हैभगवान शिव पार्वती जी को अमर कथा सुना रहे थे। पार्वती जी को कथा सुनते-सुनते नींद आ गयी और उनकी जगह पर वहां बैठे एक शुक ने हुंकारी भरना प्रारम्भ कर दिया। जब भगवान शिव को यह बात ज्ञात हुई, तब उन्होंने शुक को मारने के लिये दौड़े और उसके पीछे अपना त्रिशूल छोड़ा। शुक जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा, भागते-भागते वह व्यास जी के आश्रम में आया और सूक्ष्मरूप बनाकर उनकी पत्नी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। ऐसा कहा जाता है कि ये बारह वर्ष तक गर्भ के बाहर ही नहीं निकले। जब भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर इन्हें आश्वासन दिया कि बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा, तभी ये गर्भ से बाहर निकले और व्यासजी के पुत्र कहलाये। गर्भ में ही इन्हें वेद उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का सम्यक ज्ञान हो गया था।कथा में आचार्य ने परीक्षित से लेकर जनमेजय के सर्प यज्ञ तक की कथा सुनाई।कथा सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये। अपराह्न वेला मे अशोक शास्त्री , पं.पूर्णेंदु,की.शिखा व साध्वी रामकिशोरी जी ने भगवान की विभिन्न लीलाओं की कथा सुनाई। इस सुअवसर पर पूर्व ब्लाक प्रमुख उदयराज सिंह, ह्रदय राज सिंह,यज्ञ यजमान मोहनीश चंदेल, चन्द्र राज सिंह,अनुज सिंह,श्यामू सिंह, अमर नीरज आदि लोगो समेत सैकड़ों श्रोता उपस्थित रहे।
