हर घर तक पहुंच रहा राम मंदिर का निमंत्रण,प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए पूजित अक्षत का वितरण हुआ। श्रीराम भक्तों द्वारा खजनी कस्बे और आसपास के गांवों में अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले भगवान श्रीराम के विग्रह की प्राणप्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में भक्तों को आमंत्रित करते हुए। अक्षत और पत्रक वितरण किया गया, इस संपर्क अभियान में सभी घरों में पहुंच कर अक्षत और पत्रक देते हुए 22 जनवरी को दीप जलाकर भगवान श्रीराम की प्रतिस्थापना का उत्सव मनाने की अपील की गई। अभियान का नेतृत्व कर रहे भाजपा युवा मोर्चा के निवर्तमान जिला महामंत्री आदर्श राम त्रिपाठी ने बताया कि सभी सनतन धर्म प्रेमियों की विगत 550 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब समाप्त हो रही है। शीघ्र ही अयोध्या में हम सब के आराध्य भगवान श्री रामलला का विग्रह भव्य मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होने जा रहा है। जिसको लेकर खजनी कस्बे और आसपास के सभी गांवों में अक्षत वितरण और गृह संपर्क अभियान अपने सभी युवा साथियों के साथ चलाया जा रहा है। इस दौरान विष्णु मद्धेशिया,प्रियांशु गुप्ता,आयुष गुप्ता,सुरेश शुक्ला, भोलू जायसवाल, मनीष,सार्थक मोदनवाल,सोनू,विशाल,विक्की सहित बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थित रही।
गोरखपुर। घंटाघर रोड से लेकर पांडेयहाता रोड के दुकानदारों ने स्वेच्छा से बिना किसी प्रकार की ज़ोर जबरदस्ती के अपने वजूद अपने व्यापार को बचाने के लिए शांति प्रिय तरीके से अपनी दुकानें बंद रखी हैं। इसका मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित विरासत गलियारे की जद में आने वाली दुकानों के आंशिक या पूरी तरह से कट जाने का शांति प्रिय विरोध है। प्रस्तावित गलियारा में 16.5 मीटर सड़क की चौड़ाई जिसमें सड़क के बीच से 8.25 मीटर दोनों तरफ की मार्केट को काटकर सड़क को चौड़ा करना है। इसकी जद में आने वाली दुकानों का वजूद पूरी तरह से मिट जाएगा और प्रभावित सभी दुकानदार सड़क पर आ जायेंगे जिनके पास वर्तमान में दूसरा कोई व्यापार नहीं है , अपने घर परिवार का पालन पोषण सभी दुकानदार इन्हीं दुकानों से करते हैं। मार्केट 60 साल से ज्यादा पुराना है। सारी दुकानें हमारे सभी के दादा पिता की विरासत है जिस पीढ़ी को हमलोग आगे बढ़ा रहे हैं। अगर ये दुकानें काट दी गई तो अभी लोग मेन मार्केट से मिट जायेंगे फिर अपने पैरों पर खड़े होने में पीढ़ियां बीत जाएंगी। ज़रूरत मार्केट को संगठित करने की व्यवस्थित करने की है ना कि मार्केट को काटकर मिटा देने की विरासत गलियारा बनना चाहिए विकास सहर्ष होना चाहिए लेकिन विरासत को साथ लेकर ना की विरासत को खत्म करके नुकसान कितना हो रहा है इसका ना तो आंकलन किया जा सकता है ना ही भरपाई की जा सकती है ना ही मुआवजे का आंकलन किया जा सकता है। मुख्य उद्देश्य होना चाहिए मार्केट को व्यवस्थित करना, अतिक्रमण हटाना, जाम की असली वजह को समझना और उसका उपाय करना, सुविधाएं बढ़ाना, पार्किग बनाना, शौचालय की समुचित व्यवस्था, ठेला गाड़ी इत्यादि को समय अनुसार व्यवस्थित करना, ई रिक्शा का संचलन संयमित करना, बिजली के तार खंभे हटाकर भूमिगत करना, नाला साफ सफाई और जलभराव की समस्या से निपटना, वाहनों के प्रवेश पर सामयिक प्रतिबंध लगाना इन सभी कार्यों को कैसे किया जाए इसपर प्रशासन को हम सभी सड़क के दुकानदारों से मिलकर बात करनी चाहिए और एक मीटिंग कर के प्रस्ताव बनाना चाहिए। हम सभी सड़क के दुकानदार वास्तविकता से भली भांति परिचित हैं एवम जमीनी हकीकत से पूर्णतया परिचित हैं। बिना दुकानों को पूरी तरह या आंशिक रूप से काटे भी व्यवस्थित किया जा सकता है उसकी एक रणनीति बनाने की आवश्यकता है। सीएम योगी हमारे अभिभावक हैं पिता तुल्य हैं हम सभी उनकी छत्रो छाया में पल रहे हैं बढ़ रहे हैं उनसे इतना ही अनुरोध है कि हमारे वजूद को मिटने से बचा लें हम सभी कृतार्थ होंगे।
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गोरखपुर। बुद्धालैण्ड राज्य की मांग पूर्वांचल के 8 करोड लोगों के आत्म सम्मान को वापस दिलाने का आंदोलन है। यह बात पूर्वांचल सेना के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने प्रेस क्लब गोरखपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कही । उन्होंने बताया कि पूर्वांचल सेना वर्ष 2006 से पूरी उत्तर प्रदेश के 27 जिलों को अलग राज्य बनाए जाने की मांग कर रही है, जिसके परिणाम स्वरुप वर्ष 2011 में तात्कालिक बसपा सरकार द्वारा के प्रदेश उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, परंतु केंद्र में सत्ताधारी कांग्रेस ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया, तात्कालिक समय में भाजपा द्वारा इस राज्य के बंटवारे का समर्थन किया जा रहा था परंतु वर्तमान में केंद्र और प्रदेश में भाजपा की पुर्ण बहुमत सरकारी बहुमत की सरकारी होने के बावजूद राज्य के बंटवारे पर कोई बात नही किया जा रहा है। कुल मिलाकर राजनीतिक पार्टियों की रस्सा–कसी में पूर्वांचल की 8 करोड़ जनता पिस रही है। आजादी के बाद देश में सत्ता के विकेंद्रीकरण के तहत जिन समस्याओं के निवारण के लिए देश के नीति निर्माताओ ने छोटे राज्यों के निर्माण की बात कही थी और उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में विभाजित करने को कहा था वह समस्याएं आज के समय में वह और भी विकराल रूप ले चुकी है । 24 करोड़ की भारी आबादी वाले उत्तर प्रदेश में असफल सरकारी योजनाएं, भ्रष्टाचार के बढ़ते मामले, मुकदमों की बढ़ती संख्या से हाफता एकमात्र हाईकोर्ट, मरीज के बोझ से दम तोड़ती पीजीआई की चिकित्सा व्यवस्था, बोगस कानून व्यवस्था से पीड़ित जनता की दम तोड़ती न्यायऔर सुरक्षा की आस आज चीख चीखकर कर छोटे प्रदेश की मांग कर रही है । उन्होंने कहा कि हमारे बुद्ध, जैन, कबीर और गोरक्षनाथ की पहचान वाले क्षेत्र को लेबर बेल्ट के नाम से पहचान हमें असहनीय दर्द पहुंच रहा है। आज रोजगार के अभाव में अन्य प्रदेशों पर निर्भर हमारे लोगों को जगह-जगह प्रताड़ित किया जा रहे हैं, जो कि अब बर्दाश्त के बाहर है । उन्होंने कहा कि रोजगार, उद्योग, चिकित्सा और शिक्षा इत्यादि के लिए अन्य प्रदेशों पर लगातार बढ़ती निर्भरता इस बात का सबूत है कि हम पूर्वांचलवासी विकास की दौड़ में पिछड़ते जा रहे हैं, गरीबों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है । प्रतिभा पलायन आज भी जारी है । उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की ऐतिहासिक और संस्कृत समृद्धि को लगातार उपेक्षित किया जा रहा है, क्षेत्र में मौजूद अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन की संभावनाओं संभावनाओं का गला घोट जा रहा है । दुख की बात है कि राजनीतिक पार्टिया की सत्ता में वर्चस्व की चाहत 80 लोकसभा और 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश का बंटवारा नहीं करना चाहते, भले ही जनता का बंटाधार हो जाए । उन्होंने कहा कि अब हम 8 करोड़ पूर्वांचल वासियों को अपना हक अधिकार छीन लेना चाहिए उन्होंने कहा कि बुद्धालैण्ड राज्य का निर्माण पूर्वांचल वासियों की समस्या का स्थाई समाधान है, बुद्धालैण्ड नाम में ही इतनी क्षमता है कि हम अपने ऐतिहासिक सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतिनिधित्व करने के साथ हम लेबर जोन की पहचान से मुक्ति देकरअंतरराष्ट्रीय पहचान दे सकता है उन्होने कहा कि इस क्षेत्र में अकेले बुद्ध की बची खुची थातिया दुनिया में सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हो सकती हैं । उन्होंने कहा कि अलग राज्य निर्माण के साथ ही अलग हाईकोर्ट, अलग लोक सेवा इकाइयां अलग प्रशासनिक इकाइयां स्थापित होंगी जिससे न्याय देरी, दूरी और संख्या कम होने से न्यायिक कार्यप्रणाली में तीव्रता आएगी, शाशनिक–प्रशासनिक संचालन सुलभ होगा ,इसके अलावा नए राज्य को मिलने वाले औद्योगिक रियायतों से दुनिया भर के उद्योगों को बुद्धालैण्ड राज्य आकर्षित करेगा, यहां की श्रम शक्ति को यही रोजगार उपलब्ध होगा और युवाओं को अपने बीवी बच्चे और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर परदेस नहीं जाना पड़ेगा । उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के 8 करोड़ निवासियों को अपना आत्म सम्मान बुद्धालैण्ड राज्य लेने के लिए आर पार का आंदोलन शुरू करना होगा । उन्होंने कहा कि आगामी 7 जनवरी को बुद्ध लैंड राज्य में शामिल होने वाले 27 जिलों के प्रतिनिधियों के साथ बुद्ध लैंड राज्य की मांग को लेकर पदयात्रा आयोजित है, उन्होंने जनमानस से पदयात्रा में शामिल होने की अपील की।
जांच व जागरूकता से रुक सकता है सर्वाइकल कैंसर
और और प्रदूषण से पक्षियों का शहर गोरखपुर शहर से किनारा बसेरा अब गांव में शोध में हुआ खुलासा
गोरखपुर अनाज मंडी भाव 5 जनवरी
गोरखपुर फल मंडी भाव 5 जनवरी
गोरखपुर सब्जी मंडी भाव 5 जनवरी
गोरखपुर।v उत्तर प्रदेश प्रबंधक शिक्षक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष बाबूराम पांडे के नेतृत्व में प्रबंधक और शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल बीएसए कार्यालय पहुंचा और अपना तीन सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। प्रबंधकों की मांग है कि शासनादेश 2013 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त अस्थाई विद्यालय को 3 साल तक कोई विवाद नहीं है तो उसे अस्थाई माना जाए, जो भी विद्यालय संचालन के लिए पुराने मानक थे पुराने मानक को बहाल किया जाए और नए मानक को निरस्त किया जाए और विद्यालय संचालन करने के लिए विद्युत कनेक्शन को कमर्शियल के जगह घरेलू कनेक्शन दिया जाए। इस दौरान तमाम प्रबंधक और शिक्षक मौजूद रहे।
