उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से अनुराधा श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही है की संसद में अपराधीकरण पहले भी था और अभी भी है। राजनेता अपराधियों को उनकी सुरक्षा के लिए रखते थे क्योंकि वे उनके पास हैं । जितने अधिक अपराधी होंगे , उनकी शक्ति उतनी ही अधिक होगी और वे लोगों को डराकर वोट हासिल करेंगे ।
उत्तरप्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से अनुराधा श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हमारी महिलाएं न तो पहले के युग में स्वतंत्र थीं और न ही वर्तमान युग में स्वतंत्र हैं । एक समय था जब महिलाएं अपने दम पर कुछ भी नहीं कर सकती थीं , उसके अनुसार आज कुछ बदलाव आया है क्योंकि महिलाओं पर उतने प्रतिबंध नहीं हैं जितना आप सभी जानते हैं । नौकरी हो या पेशा , हर क्षेत्र में आने वाली हमारी महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं । वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं , लेकिन यह कहा गया है कि महिलाओं के लिए , समय कभी नहीं बदलता है कि आप क्या सोचते हैं कि आपके बेटे रात के 12 बजे कहीं जाना चाहते हैं , लेकिन आप बेटियों को वहां नहीं भेजेंगे क्योंकि आप जानते हैं कि हम बाहर ऐसे जंगली हैं जो हमेशा हमारी बेटियों को नुकसान पहुँचाने की तलाश में रहते हैं । आप रात में बारात नहीं भेज सकते , लेकिन अगर आप बच्चों को पढ़ने , घूमने , पार्टी करने के लिए बाहर भेज रहे हैं , तो आप भेजेंगे । कोई भी काम करने से पहले परिवार के माता - पिता , फिर ससुराल वालों , फिर समाज की देखभाल करें और अगर वह स्वेच्छा से कुछ करती है तो उसे आगे बढ़ना होगा । आपको इतने सारे खिताब दिए जाते हैं कि आप इस तरह से अपनी मनमानी कर रहे हैं , इसलिए आप इधर - उधर जा रहे हैं , इस तरह के प्रतिबंध नहीं होने चाहिए । काम करने के लिए , लेकिन उनके पति , उनके परिवार के सदस्य रुक जाते हैं कि आपको यह काम नहीं करना है , लेकिन वे उस काम को स्वेच्छा से नहीं कर सकते ।
बुखार में मौसमी जूस पीने से मिलने वाले फायदे
मुंह में रात भर तुलसी का पत्ता रखकर सोने से होने वाले फायदे
उत्तरप्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से तारकेश्वरी श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आंदोलन के योगदान का पुनर्मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण पहलू उन सभी महिलाओं की यात्रा है जो अपनी आवाज उठाने के लिए साहसी हैं । आजाद नारी खोज एक सामाजिक आंदोलन है जो महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास करता है । उन महिलाओं को याद करते हैं जिन्होंने अपने जीवन में विशिष्टता और साहस की शक्ति दिखाई है , जिसके परिणामस्वरूप एक ऐसा समाज बना है जो सकारात्मक परिवर्तन को प्रेरित कर रहा है ।
कस्बे में बहुरूपिए को देखते ही जुटी बच्चों की भीड़ खजनी गोरखपुर।। कस्बे में जोकर के वेश में एक बहुरूपिया घूमता मिला। अपने मुंह से लंगूर (काले बंदर) की आवाजें निकालते हुए जैसे ही छलांग लगाता था। बच्चे पीछे हट जाते थे।वह अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए घरों और दुकानों में पहुंच कर लोगों से पैसे मांगता हुआ घूम रहा था। पूछने पर उसने बताया कि उसका नाम राजू है और वह दिल्ली से आया है, साथ ही यह भी बताया कि उसके गुरू किसन बहुरूपिया हैं और उनका यू-ट्यूब चैनल भी इसी नाम से चलता है। देखने पर पता चला कि हजारों की संख्या में लोग इनसे मनोरंजन पा रहे हैं। अपनी कला से स्थानीय लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने और उनसे कुछ रूपए कमाना ही इनका रोजगार है। बंदर, भालू, जोकर, शंकर, अघोरी, राक्षस, अपराधी और रामायण तथा महाभारत काल के पात्रों के रूप बनाना इनका पेशा है। पेट की खातिर या यूं कहें कि रोजी-रोटी कमाने के लिए लोग विभिन्न प्रकार के उपक्रम करते हैं। मेहनत,मजदूरी,व्यापार और नौकरी जैसे विभिन्न माध्यमों से जीविकोपार्जन के उपाय समाज में प्रचलित है। किंतु बहुरूपिया बन कर अपनी कला से रोजी-रोटी कमाने की एक बहुत ही पुरानी प्रथा रही है। पौराणिक काल और राजाओं महाराजाओं के दौर से ही देश में यह एक सदियों पुरानी परंपरा रही है। राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में आज भी बहुरूपिया कलाकारों की जमात मौजूद है। जिसमें एक ही कलाकार द्वारा विभिन्न पात्रों का हूबहू स्वांग रचकर सीमित साधन,पात्रानुकूल वेशभूषा व बोली,विषयगत हाव-भावों का मनोरंजक प्रस्तुतीकरण बहुरुपिया कला को प्रदर्शित करता है। बहुरुपिया कलाकारों का अभिनय इतना स्वाभाविक होता है कि असल और नकल में भेद कर पाना मुश्किल हो जाता है। अमूमन बहुरुपिया कलाकार जो ‘मेकअप’ करते हैं, उसे ‘रंगोरी’ कहा जाता है। इसके लिए ये स्वयं रंगों का निर्माण करते हैं। प्राकृतिक पदार्थों से रंग बनाना इनकी गोपनीय कला है, जिसके बारे में ये ही जानते हैं। कला प्रदर्शन के बाद रंग उतारने के लिए ये एक विशिष्ट प्रकार का ‘रिमूवर’ बनाते हैं, जिसे इनकी भाषा में ‘उतरहट’ कहा जाता है। विशेष बात तो यह है कि साज-सज्जा करने के लिए ये कलाकार आपस में अपनी गोपनीय कला नहीं बताते हैं।
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मारवाड़ी युवा मंच द्वारा तीन दिवसीय निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का हुआ शुभारंभ। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो को पूरा सुने धन्यवाद।
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