जय राम रमेश ने संसद के नए भवन को भूल भुलैया बताते हुए कहा अगर आप पुरानी इमारत को खो जाते तो आपको अपना रास्ता फिर मिल जाता क्योंकि वह गोलाकार है इन नई इमारत में आप रास्ता भूल जाते हैं तो भूल भुलैया में खो जाएंगे पुरानी इमारत के अंदर और परिसर में खुलेपन का एहसास होता है जबकि नई इमारत में घुटन महसूस होती है अब संसद में भ्रमण का आनंद गायब हो गया अब मैं पुरानी बिल्डिंग में जाने के लिए उत्सुक रहता था नया कंपलेक्स दर्दनाक और पीड़ा देने वाला है
