उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब भी कोई समस्या या विपत्ति आती है तो जिसके नाम से जमीन होती है मुआवज़ा भी उसी को मिलता है। गाँव में बाढ़ सूखा आने से नुक्सान हो जाता है। अगर महिलाओं के पास जमीन होता तो वो आर्थिक रूप से मज़बूत होगी और अपना भविष्य सुरक्षित कर पाएगी

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि कई वर्षों से महिलाओं को जमीन देने की बात हो रही है लेकिन शहर हो या गाँव महिलाओं को जमीन दी नहीं जाती है। एक जॉइंट ओनरशिप होती है जिसमे पति पत्नी दोनों के नाम से जमीन होती है। इससे दोनों की सुरक्षा और बराबरी बनी रहती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिला आर्थिक रूप से सुरक्षित होती है तो वो स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे पाती है। जमीन में नाम रहने से महिला आर्थिक रूप से सुरक्षित होगी और अपने बारे में सोच पाएगी

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिलाओं के नाम जमीन होती है तो घर में महिलाओं की आवाज़ ज़्यादा सुनी जाती है। घर के हर के फैसले में महिलाओं की भूमिका बढ़ती है। ये सिर्फ कागज़ का अधिकार नहीं बल्कि निर्णय लेने की शक्ति भी है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि 1956 हरमनई अदालत ने साफ कहा था की पहले हुई मृत की स्थिति में बेटी पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं मानी जाएगी। 1956 की कानून के अनुसार केवल पुत्र को ही उत्तराधिकार का अधिकार हासिल होता था। लेकिन बेटी को हिस्सा तब ही मिलता था जब परिवार में बेटा ना हो। इसलिए ऐसी स्थिति में बेटियों को हक़ नहीं मिलेगा।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि पति की मृत्यु के बाद विधवा बहु अपने हिस्से के लिए ससुर की संपत्ति में दावा कर सकती है। क्योंकि मृत्यु के बाद उसके कानूनन वारिश में विधवा पत्नी और उसके बच्चे शामिल होते हैं

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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 44 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि पट्टे की जमीन के लिए प्रधान से यह लिखवाना होगा कि व्यक्ति के पास जमीन नहीं है ,इसके बाद सम्बंधित लेखपाल से मिलकर एक ऑनलाइन एप्लीकेशन भी देना होता है। जिसपर लेखपाल अपनी रिपोर्ट लगाते है और यह सक्षम अधिकारी के पास जाता है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद तहसील से जानकारी होती है। इस प्रकार पत्नी को जमीन मिल सकता है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि सबुर मिशा ने बताया कि इनके पिता द्वारा इन्हें जमीन मिला है। इससे वो खुश है। साथ ही इन्हे किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि साउघाट प्रखंड निवासी नाज़मा ने बताया कि इनके पति ने नाजमा के नाम से ज़मीन लिया ,खेत लिया ,रजिस्ट्री करवाने में पैसे भी कम लगे। बस एक समस्या आ रही है कि केवाईसी भी अपडेट है ,सब चीज़ सही रहने के बावजूद किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है।