दुबौलिया क्षेत्र के बैरागल पूरेउपाध्याय मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवे दिन मथुरा वृदाबन धाम से पधारे बृज रसिक आचार्य कैलाश राधाशरण जी महराज ने भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह प्रसंग का उल्लेख किया। उस दौरान फूलों की वर्षा के बीच श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की झांकी निकाली गई। वरमाला का दृश्य देखकर यहां उपस्थित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु झूम उठे। आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण अलौकिक हैं। श्रीकृष्ण के गुणों एवं सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मिणी ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण के अलावा अन्य किसी को भी पति के रूप में वरण नहीं करेंगी।
