उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से आशीष मिश्रा पिता श्री राम प्यारे से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दी गयी नल जल योजना के तहत पानी नहीं मिल रहा है.
साथियों, हमें बताएं कि क्या आपके क्षेत्र के सरकारी जिला अस्पतालों, उपस्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य केन्द्रों, आंगनबाडी में पानी की कमी है? क्या वहां प्रशासन ने पानी की सप्लाई व्यवस्था दुरूस्त नहीं की है? अगर अस्पताल में पानी नहीं मिल रहा है तो मरीज कैसे इलाज करवा रहे हैं? क्या पानी की कमी के कारण बीमार होते हुए भी लोग इलाज करवाने अस्पताल नहीं जा रहे? या फिर आपको अपने साथ घर से पानी लेकर अस्पताल जाना पड़ रहा है? अपनी बात अभी रिकॉर्ड करें, फोन में नम्बर 3 दबाकर.
नाम कुसुम पति मिथिलेश मौज सत्रीय असेला
नाम अवधेश कश्यप का नाम रामकमल
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला के मौजा भूपगंज से विशाल सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से रमेश कुमार पिता का नाम धर्मपाल से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा पानी की टंकी लगाई है, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं है साथ ही उन्हें राशन भी नहीं मिलता ,रोड की भी व्यवस्था नहीं है।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से राजेश पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की महिलाओं को भूमि के अधिकार से वंचित करने के प्रमुख कारणों में से एक है भूमि के अधिकारों और महिलाओं की स्थिति के बारे में जागरूकता।महिलाओं को कभी भी बाहर आने और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की अनुमति नहीं थी, एक प्रमुख कारण है कि यह आज भी वैसा ही है। पुरुषों के दिमाग में कहीं न कहीं एक कोने में घर बनाए जा रहे हैं, जिसके कारण महिलाओं को जमीन का अधिकार नहीं मिल रहा है,
मोहम्मद सफी पिता जामिन अली मौज सिंगापुर बगिया पानी का सप्लाई नहीं
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से राजेश पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की महिलाओं की स्थिति में भूमि अधिकारों और मर्दानगी के बारे में जागरूकता कहीं न कहीं बाधा बन रही है नमस्कार दोस्त में राजेश पाठक बहराइच मोबाइल वैन से दोस्त राजीव की डायरी पहला अंक भूमि अधिकारों और महिलाओं के बारे में जागरूकता महिलाओं की बात करें तो मर्दानगी कहीं न कहीं बाधा बन रही है, यह बहुत लंबे समय से चल रहा है कि पुरुषों को ओवररेटेड किया जाता है, महिलाओं को अंडररेटेड किया जाता है, इसलिए मर्दानगी और स्त्रीत्व दो चीजें हैं जो पुरुषों से निकलती हैं। ऐसा लगता है कि अगर भूमि या ऐसा कोई संत महिलाओं के नाम पर रहता है, तो यह मर्दानगी में कम हो जाता है। ऐसी मानसिकता है कि लोग महिलाओं के नाम पर जमीन हस्तांतरित करने से कतराते हैं। इसलिए देखा गया है कि अगर ज्यादातर लोगों की मर्दानगी रास्ते में नहीं आएगी तो जमीन भी महिलाओं के नाम पर होगी और उन्हें भी उनका लाभ मिलेगा।
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
सूबेदार पिता सू करो मौज बड़ी काशी जोत
