हम सभी रोज़ाना स्वास्थ्य और बीमारियों से जुड़ी कई अफवाहें या गलत धारणाएं सुनते है। कई बार उन गलत बातों पर यकीन कर अपना भी लेते हैं। लेकिन अब हम जानेंगे उनकी हकीकत के बारे में, वो भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में। याद रखिए, हमारा उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए जागरूक करना है। सेहत और बीमारी को लेकर अगर आपने भी कोई गलत बात या अफवाह सुनी है, तो फ़ोन में नंबर 3 दबाकर हमें ज़रूर बताएं। हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानेंगे उन गलत बातों की वास्तविकता, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में।
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नमस्ते दोस्तों , मै लक्ष्मी वाजपेयी और आप बहराइच मोबाइल वानी सुन रहे हैं , लीलावती नाम की एक महिला गाँव में रहती थी , लीलावती के पास एक बकरी थी , जब भी वह उसे चराने जाती थी , वह किसी के भी खेत में चलती थी । एक दिन लीलावती ने अपनी बकरी को गाँव में ही पंडित दीनदयाल जी के खेत में छोड़ दिया । जब पंडित जी को पता चला कि लीलावती की बकरी उनका खेत चला रही है , तो उन्हें बहुत गुस्सा आया । पंडित जी ने डेटा पर लीलावती से कहा कि मुझे बकरी बांधनी है । बकरी के लिए रस्सी नहीं है , मुझे क्या करना चाहिए ? पंडित जी ने लीलावती को बकरी बांधने के लिए रस्सी दी , लेकिन दो - तीन दिन बाद फिर वही हुआ । मैंने लीलावती से कहा कि मैंने उसे बकरी बांधने के लिए एक रस्सी दी थी , लेकिन फिर भी उसने अपनी बकरी नहीं बांधी । जैसे ही लीलावती ने यह सुना , उसने मुड़कर कहा , " ओह , अगले दिन सड़ी हुई रस्सी टूट गई थी । " बकरी को चौबीस घंटे के लिए कंकड़ से बांध दिया जाता है , पंडित जी को अपने खेत की रक्षा खुद करनी चाहिए । लीलावती ने बकरी को बांधने से साफ इनकार कर दिया । पंचायत ने यह भी फैसला सुनाया कि आपको अपने खेत की खुद रक्षा करनी चाहिए । पंडित जी निराश होकर घर चले गए । जब वह लौटे तो फसलें मक्खियों और कीड़ों से अधिक प्रभावित हो गई थीं , जिससे फसलें खराब हो रही थीं । लीलावती की बकरी बीमार होने लगी जब उसने इस बार पंडित जी की फसल खा ली । लीलावती ने इसे ठीक करने के लिए एक डॉक्टर को देखा और एक महीने तक दवा खिलाई । लीलावती का हजारों बकरियों का इलाज किया गया । पैसा खर्च हो गया , लेकिन बकरी ठीक नहीं हुई और एक दिन भगवान प्रसन्न हुए । अब इस बार लीलावती ने एक पंचायत को बुलाया और पंडितजी ने भी कहा कि मैंने अपनी फसल की रक्षा की , लेकिन लीलावती ने अपनी बकरी की रक्षा नहीं की ।
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