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साथियों, आपके यहां पानी के प्रदूषण की जांच कैसे होती है? यानि क्या सरकार ने इसके लिए पंचायत या प्रखंड स्तर पर कोई व्यवस्था की है? अगर आपके क्षेत्र में पानी प्रदूषित है तो प्रशासन ने स्थानीय जनता के लिए क्या किया? जैसे पाइप लाइन बिछाना, पानी साफ करने के लिए दवाओं का वितरण या फिर पानी के टैंकर की सुविधा दी गई? अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो आप कैसे पीने के पानी की सफाई करते हैं? क्या पानी उबालकर पी रहे हैं या फिर उसे साफ करने का कोई और तरीका है? पानी प्रदूषित होने से आपको और परिवार को किस किस तरह की दिक्कतें आ रही हैं?
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सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
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नाम विशाल सिंह ब्लॉक हजूरपुर थाना हुजूरपुर पयागपुर जिला बहराइच
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा केला की फसल में बोरान की कमी के लक्षण तथा उपचार के बारे में जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पाण्डेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि हर महिला को अपने फैसले खुद लेना शुरू करना चाहिए , यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे फैसले कोई और क्यों ले, हमे अपना निर्णय खुद लेना चाहिए। हमें सब कुछ कहना सीखना चाहिए। महिलाएं अपने मन की बात कहने से न डरें, शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहें, घमंड न करें, योग का अभ्यास करें, खुद को शिक्षित करें। आत्मनिर्भर बनें, आप कोई भी काम अकेले करें, आप किसी पर निर्भर नहीं हैं, जब आप किसी और पर निर्भर हैं, तो आप अपना निर्णय खुद नहीं ले पाएंगे। ऐसा करने के साथ-साथ, अब पूरी महिला जाति, विशेष रूप से युवा लड़कियों, जिन्हें स्वच्छता और मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है, महिलाओं के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाएं। उन्हें यह भी जानकारी दें कि उन्हें अपने लिए बोलना चाहिए। सभी महिलाओं के कल्याण के लिए कैसे खड़ा होना है, मातृ शक्ति को जागना होगा, हमें लड़के या लड़की के पालन-पोषण में भेदभाव भी नहीं करना चाहिए और फिर खुद कई लड़के पैदा करने की प्रक्रिया में भी। मतलब, वे लड़कियों को मार देते हैं, उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए, चाहे वह लड़का हो या लड़की, इसका मतलब है कि वे खुद लड़के और लड़की के बीच भेदभाव करते हैं। लड़कियाँ लड़कियाँ हैं, उन्हें ऐसे सामान्य स्कूल में किसी भी स्कूल में डाल दें, अपने लिए लड़ना सीखें, लड़के को लड़कियों का सम्मान करना सिखाएं, उन्हें सम्मान दें। हर बेटी एक मजबूत महिला होगी, इसलिए हर महिला खुद को इतना मजबूत बनाये कि वे किसी पर निर्भर न हों।
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उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला के ब्लॉक नवाबगंज के तहसील नामपारा से शालिनी पाण्डेय मोबाइल वाणी के माध्यम से पवन से बातचीत की। बातचीत में पवन ने बताया कि महिलाओं के भूमि के अधिकार का मुद्दा गंभीर और व्यापक है और हमारी सरकार ने इसके लिए बड़े कदम उठाए हैं। महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री होती है तो स्टाम्प शुल्क कम लगता है इसलिए पुरूष सोचते हैं कि जमीन ले रहे हैं, कहीं खरीद रहे हैं, यदि वे जमीन महिला के नाम पर रजिस्ट्री करा लेंगे तो उसमें उनका पैसा कम लगेगा। इससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा। इस कारण जमीन महिलाओं के नाम पर की जाती है और महिलाओं को लगता है कि समाज में उनके नाम पर भी कुछ प्रॉपर्टी है और समाज में उनकी भी कुछ हिस्सेदारी है। साथ ही भूमि सुधार में सरकार द्वारा बहुत अच्छा कदम उठाया गया है। भूमि सुधार में बेहतर कदम सरकार ने उठाया और इसमें पुरुषों को भी थोड़ा शिक्षित होना चाहिए। बहुत से लोग इन दिनों सोचते हैं कि हम अपनी जमीन महिलाओं के नाम पर क्यों लें.लोगों को इस तरह की सोच को खत्म कर देना चाहिए, तभी हमारा समाज आगे बढ़ेगा और आर्थिक और सामाजिक विकास होगा ।महिलाएं पुरुषों से कम नहीं है, बस उन्हें समाज में अपनी बात रखने का मौका दें, उन्हें शिक्षित किया जाना चाहिए । महिलाओं को सशक्त बनाना चाहिए। हमारे देश में महिलाओं की कोई पहचान नहीं है। महिला को उसके पुरुष के नाम से जाना जाता है, वह उसकी पत्नी है और यह उसकी बहन है या उनकी दादी हैं, इसलिए उन्हें समाज में एक मौका दिया जाना चाहिए कि वे समाज में अपनी पहचान बना सकें, यानी चाहे वे अपने नाम से जाना चाहते हों इससे महिलाएं सशक्त होंगी । इसमें हम हमारे राष्ट्रपति को लें सकते हैं अब उनकी अपनी अलग पहचान है, वह अपने पति के नाम से नहीं जानी जाती हैं, वह अपने नाम से जानी जाती हैं, द्रौपदी मुर्मू, जो हमारे देश की राष्ट्रपति हैं। ऐसे ही जब महिलाएं सशक्त होंगी, तो उनकी अपनी पहचान होगी, उनका विकास होगा, उनका मानसिक विकास होगा साथ ही सामाजिक विकास होगा।
