उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से नीतू से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि समाज में महिलाओं को भूमि का अधिकार ना मिलने का सबसे बड़ा कारण शिक्षा है। हमारे समाज में महिलाओं को भूमि अधिकार मिलना चाहिए जिस तरह से पढ़ी लिखी महिलायें घर के अंदर बैठी रह रही हैं। उन्हें रोजगार के अवसर दे दिए जाने चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला के शिव कुमार तिवारी मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता शिवनारायण पांडेय से बात की, उन्होंने बताया की महिलाये अपना निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकती है। आज कल बहुत से पति अपना जमीन अपने पत्नी के नाम पर कर देते है।भूमि के अधिकार को लेकर महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं है। पति के रहते उन्हें भूमि का अधिकार नहीं मिलना चाहिए
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उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला के शिव कुमार तिवारी मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता दुधानाथ से बात की, उन्होंने बताया की महिलाये अपना निर्णय लेने के लिए बिलकुल स्वतंत्र है उन पर किसी प्रकार का कोई दबाओ नहीं है। उनका कहना है की महिलाये भूमि के अधिकार का गलत इस्तेमाल भी कर सकते है। उनके भूमि का अधिकार तब ही मिलना चाहिए जब उनके पिता या पति का देहांत हो जाये। महिलाओं और भूमि अधिकार के बीच बहुत सारी बाधाऐं है, जिसे केवल सरकार ही दूर कर सकती है।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता ब्रज कुमार सिंह से बात किया, उन्होंने बताया की हमारे समाज में महिलायें आगे बढ़ रही है जब से हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आये है तब से सबका विकास हो रहा है। महिलाओं को हर जगह छूट मिल रहा है और आगे भी बहुत सारे छूट सरकार के द्वारा दिए जायेंगे
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उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी तिवारी मोबाइल वाणी के माध्यम से ममता से बातचीत की। बातचीत में ममता ने बताया की महिलाएं शिक्षित होने से समाज में आगे बढ़ सकती हैं और उन्हें सम्मान मिल सकता है। शिक्षित होने से महिलाएं अपने अधिकारों को जान सकती हैं।महिलाओं को उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भूमि अधिकारों के कारण उसे पिछड़ा माना जाता है। अधिकांश महिलाओं में जो सुधार हो सकता है ,वह अपने पतियों के सामने उनका सम्मान भी बढ़ा सकता है, वे अपने परिवार के प्रति भी सम्मान बढ़ा सकती हैं और हर कोई उनका अधिक सम्मान करना शुरू कर देगा। अगर उन्हें कुछ होता है तो वह जमीन होगी।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से राजेश पाठक ने मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रधान जी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि महिलाओं में पहले से ही थोड़ी जागरूकता आ गई है। क्योंकि गाँव में भी साक्षरता अभियान चलाया गया था, लेकिन बीच में ही बाधित हो गई थी , उससे महिलाये शिक्षित होने लगी थी और सरकार या संविधान द्वारा तय किया कि उन्हें भी पुरुष के बराबर अधिकार होने चाहिए। महिलाये एक बंधन में बंधी हुई है,पति-पत्नी के बीच एक बंधन है, अगर वे अपनी आजीविका कमाने के लिए स्वतंत्र रूप से किसी तरह की नौकरी करती हैं, तो अपने पति से भी पूछकर अब आगे बढ़ सकती हैं और इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। उसके अंदर बहुत कुछ है और वह भी अपने पति के अनुसार धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। भूमि का अधिकार मिलने से सामाजिक-आर्थिक दोनों ही रूप से बदलाव देखने को मिलेगा। क्योंकि मान लीजिए कि किसी की माँ और उसके दो बेटे हैं, पहले भूमि का अधिकार माताओं के पास नहीं था, लेकिन संविधान के अनुसार, अब भूमि का अधिकार माँ के पास है। इससे और सरकार द्वारा कई योजनाओं में वंचित होने के बजाय एक लाभार्थी बन जाती है। मान लीजिए कि महिला लंबे समय से अपने ससुराल में रह रहे हैं और पति की मृत्यु हो गई है, अगर उन्हें जमीन का अधिकार मिलता है, तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर महिला अपने मायके में रहती है, तो अगर पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह का विवाद होता है, तो वहां से वह दूसरी जगह जा सकती है और उस जमीन को बेच सकती है। इसलिए, कुछ दिनों के लिए उस ग्राम सभा में नागरिकता प्राप्त करने के बाद ही, जब उसके पति का उस पर विश्वास हो जाता है, तो वह उसे अपनी पत्नी दोनों के संबंध में जब चाहे जमीन का अधिकार दे सकता है और संविधान के अनुसार दोनों समान होने चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से राजेश पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है,यहाँ अधिनायकवाद है, इसलिए महिलाओं की स्थिति उनके नीचे कहीं दिखाई देती है। महिलाओं को भूमि का अधिकार मिले, इसके लिए मोबाइल वाणी एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम चला रहा है, बहराइच जिला के प्रयागपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले टिपरा गाँव से बालमुकुंद गोविंद से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि महिलाएं अभी भी पिछड़ी हुई हैं, महिलाओं की स्थिति ऐसी है कि वे कई मायनों में अपने अधिकारों से वंचित हैं। हालाँकि, यह शिक्षा की प्रगति के साथ-साथ बढ़ रहा है। आज के समय में महिलाओं के स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम होने या न होने की तुलना में बहुत बड़ा बदलाव दिख रहा हैं। इस तानाशाह समाज में महिलाओं की स्थिति दयनीय है क्योंकि वे आज भी स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पाती हैं, उन्हें अपने पति या भाई या अन्य लोगों से सलाह लेनी पड़ती है। अगर महिलाओं को भूमि का अधिकार दिया जाए, तो उन्हें सामाजिक और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रिया से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि महिलाएं अभी भी पिछड़ी हुई हैं महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिलता है। वे'खुद का निर्णय नहीं ले पाती हैं उनके लिए उनका निर्णय उनके पति या सास ससुर लेते हैं। महिलाएं भूमि अधिकार प्राप्त करके अपने जीवन स्तर और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकती हैं। भूमि का अधिकार मिलता है, तो वे अपने बच्चों को इससे आगे बढ़ाएंगे, पढ़ेंगे, शिक्षा प्राप्त करेंगे, और वे जिस स्थिति में हैं, उसे ठीक किया जाएगा, ताकि वे देश की स्थिति आगे बढ़ सकें। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए भूमि अधिकारों को प्राप्त करने में कई बाधाएं आती हैं। पुरुष जमीन नहीं देना चाहते क्योंकि वे महिलाओं को कभी भी अपने बराबर नहीं देख सकते। महिलाओं को भूमि अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उन्हें शिक्षित करना बहुत जरूरी है
